अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं (ललिता ध्यान) PDF
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अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं धृतपाशाङ्कुशपुष्पबाणचापाम् । अणिमादिभिरावृतां मयूखैः अहमित्येव विभावये भवानीम् ॥
Aruṇāṁ karuṇātaraṅgitākṣīṁ Dhṛtapāśāṅkuśapuṣpabāṇacāpām | Aṇimādibhirāvṛtāṁ mayūkhaiḥ Ahamityeva vibhāvaye bhavānīm ||
मैं भवानी का ध्यान करता हूँ — जो अरुण वर्ण की हैं, जिनके नेत्र करुणा की तरंगों से तरंगित हैं, जो पाश, अंकुश, पुष्पबाण और धनुष धारण करती हैं, जो अणिमा आदि सिद्धियों की किरणों से आवृत हैं — और मैं उन्हें अपने ही स्वरूप के रूप में, 'मैं ही वह हूँ' इस भाव से ध्यान करता हूँ।