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महालक्ष्मी ध्यान (अक्षस्रक्परशुं) PDF

महालक्ष्मी ध्यान (अक्षस्रक्परशुं) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

ॐ अक्षस्रक्परशुं गदेषुकुलिशं पद्मं धनुष्कुण्डिकां दण्डं शक्तिमसिं च चर्म जलजं घण्टां सुराभाजनम्। शूलं पाशसुदर्शने च दधतीं हस्तैः प्रसन्नाननां सेवे सैरिभमर्दिनीमिह महालक्ष्मीं सरोजस्थिताम्॥

om akṣa-srak-paraśuṃ gadeṣu-kuliśaṃ padmaṃ dhanuṣ-kuṇḍikāṃ daṇḍaṃ śaktim-asiṃ ca carma jala-jaṃ ghaṇṭāṃ surā-bhājanam | śūlaṃ pāśa-sudarśane ca dadhatīṃ hastaiḥ prasannānanāṃ seve sairibha-mardinīm-iha mahālakṣmīṃ saroja-sthitām ||

मैं कमल पर विराजमान, महिषासुर का मर्दन करने वाली, प्रसन्न मुख वाली महालक्ष्मी की आराधना करता हूँ — जो अपने (अठारह) हाथों में अक्षमाला, परशु, गदा, बाण और वज्र; कमल, धनुष और कमण्डलु; दण्ड, शक्ति, असि (तलवार) और ढाल; शंख, घण्टा और मधुपात्र; तथा शूल, पाश और सुदर्शन चक्र धारण करती हैं।