अन्नं ब्रह्मेति PDF
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अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात् । अन्नाद्ध्येव खल्विमानि भूतानि जायन्ते । अन्नेन जातानि जीवन्ति । अन्नं प्रयन्त्यभिसंविशन्तीति ॥
annaṁ brahmeti vyajānāt annāddhyeva khalv imāni bhūtāni jāyante annena jātāni jīvanti annaṁ prayanty abhisaṁviśantīti
उसने जाना कि अन्न ही ब्रह्म है। क्योंकि निश्चय ही अन्न से ही ये समस्त प्राणी उत्पन्न होते हैं; उत्पन्न होकर अन्न से ही जीवित रहते हैं; और (मृत्यु के समय) पुनः अन्न में ही लीन हो जाते हैं।