अन्तर्ज्योतिर्बहिर्ज्योतिः (शिवोऽहम्) PDF
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अन्तर्ज्योतिर्बहिर्ज्योतिः प्रत्यग्ज्योतिः परात्परः। ज्योतिर्ज्योतिः स्वयंज्योतिरात्मज्योतिः शिवोऽस्म्यहम्॥
antar-jyotir bahir-jyotiḥ pratyag-jyotiḥ parāt-paraḥ | jyotir-jyotiḥ svayaṃ-jyotir ātma-jyotiḥ śivo'smy aham ||
अन्तर का प्रकाश और बाह्य प्रकाश, अन्तर्यामी आत्मज्योति, परात्पर; ज्योतियों की भी ज्योति, स्वयं-प्रकाशमान, आत्मा का दीप्त प्रकाश — वही शिव मैं हूँ।