अपराधसहस्राणि — Word-by-Word Meaning
अपराधसहस्राणि
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Traditional Kshama Prarthana (forgiveness) verse recited to conclude worship
Author: Traditional (anonymous devotional verse)
Period: Classical (Puranic / liturgical devotional tradition)
हिन्दू उपासना परम्परागत रूप से क्षमापन से समाप्त होती है — अनुष्ठान में हुई किसी भी चूक के लिए क्षमा माँगने वाली प्रार्थना, क्योंकि यह स्वीकार किया जाता है कि मानवीय भक्ति सदा अपूर्ण होती है। यह श्लोक ऐसी प्रार्थनाओं में सबसे अधिक प्रयुक्त है। निश्छल सरलता से यह स्वीकार करता है कि 'मुझसे दिन-रात सहस्रों भूलें होती हैं', और अपनी समस्त आशा प्रभु की अपने दास पर कृपा में रखता है। पीढ़ियों के उपासकों से होकर आया यह श्लोक, चाहे किसी भी देवता की उपासना हो, पूजा को विनम्रता एवं समर्पण में समाप्त करने का मानक एवं प्रिय रूप बन गया है।
Frequently Asked Questions
अपराधसहस्राणि श्लोक कब पढ़ा जाता है?▼
पूजा के अन्त में हम क्षमा क्यों माँगते हैं?▼
क्या यह श्लोक किसी भी देवता के लिए प्रयुक्त हो सकता है?▼
इस मन्त्र का मुख्य भाव क्या है?▼
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