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अर्जुनकृत दुर्गा स्तोत्रम् PDF

अर्जुनकृत दुर्गा स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

नमस्ते सिद्धसेनानि आर्ये मन्दरवासिनि। कुमारि कालि कापालि कपिले कृष्णपिङ्गले॥

namaste siddha-senāni ārye mandara-vāsini | kumāri kāli kāpāli kapile kṛṣṇa-piṅgale ||

हे सिद्धों की सेना की सेनापति! हे मन्दराचल पर निवास करने वाली आर्ये! आपको नमस्कार है — हे कुमारि, हे कालि, हे कापालि, हे कपिले, हे कृष्णपिङ्गले!

भद्रकालि नमस्तुभ्यं महाकालि नमोऽस्तु ते। चण्डि चण्डे नमस्तुभ्यं तारिणि वरवर्णिनि॥

bhadrakāli namas-tubhyaṃ mahākāli namo'stu te | caṇḍi caṇḍe namas-tubhyaṃ tāriṇi vara-varṇini ||

हे मङ्गलमयी भद्रकालि, आपको नमस्कार; हे महाकालि, आपको नमस्कार हो; हे चण्डि, हे चण्डे, आपको नमस्कार; हे तारिणि, हे वरवर्णिनि!

कात्यायनि महाभागे करालि विजये जये। शिखिपिच्छध्वजधरे नानाभरणभूषिते॥

kātyāyani mahā-bhāge karāli vijaye jaye | śikhi-piccha-dhvaja-dhare nānā-bharaṇa-bhūṣite ||

हे महाभाग्यशालिनी कात्यायनि, हे करालि, हे विजये, हे जये! हे मयूरपिच्छ की ध्वजा धारण करने वाली, नाना आभूषणों से विभूषित देवि!

अट्टशूलप्रहरणे खड्गखेटकधारिणि। गोपेन्द्रस्यानुजे ज्येष्ठे नन्दगोपकुलोद्भवे॥

aṭṭa-śūla-praharaṇe khaḍga-kheṭaka-dhāriṇi | gopendrasyānuje jyeṣṭhe nanda-gopa-kulodbhave ||

हे विकराल शूल (त्रिशूल) धारण करने वाली, हे खड्ग और ढाल धारिणि! हे गोपेन्द्र (कृष्ण) की अनुजा, हे ज्येष्ठे, हे नन्दगोप के कुल में जन्म लेने वाली!

महिषासृक्प्रिये नित्यं कौशिकि पीतवासिनि। अट्टहासे कोकमुखे नमस्तेऽस्तु रणप्रिये॥

mahiṣāsṛk-priye nityaṃ kauśiki pīta-vāsini | aṭṭa-hāse koka-mukhe namas-te'stu raṇa-priye ||

हे महिषासुर के रक्त से सदा प्रसन्न रहने वाली, हे पीताम्बरधारिणी कौशिकि! हे अट्टहास करने वाली, हे (विकराल) कोकमुखी! हे रणप्रिये, आपको नमस्कार हो!