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अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता — Word-by-Word Meaning

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

अष्ट
ashta
आठ
सिद्धि
siddhi
सिद्धियाँ, अलौकिक शक्तियाँ, आध्यात्मिक पूर्णताएँ (अष्ट सिद्धि)
नौ
nau
नौ
निधि
nidhi
निधियाँ (नौ दिव्य कोष, नव-निधि)
के दाता
ke data
के दाता / देने वाले
अस
as
ऐसा, यह
बर
bar (var)
वर, वरदान, आशीर्वाद
दीन
deen (din)
दिया, प्रदान किया
जानकी
Janaki
जानकी, राजा जनक की पुत्री सीता
माता
mata
माता

Complete Translation

आप अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं; यह वरदान आपको माता जानकी (सीता) ने प्रदान किया है॥

Origin & History

Source: Hanuman Chalisa (chaupai)

Author: Tulsidas

Period: 16th century CE

हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास उस वरदान का स्मरण करते हैं जो हनुमानजी को माता सीता से प्राप्त हुआ। परम्परा के अनुसार, सीता की खोज और लंका से उद्धार के समय उनकी असीम भक्ति और सेवा से द्रवित होकर सीता (जानकी) ने हनुमानजी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि प्रदान करने का अधिकार आशीर्वाद-रूप में दिया। यह चौपाई उसी कृपा का गुणगान करती है, हनुमानजी को आध्यात्मिक पूर्णता और सांसारिक ऐश्वर्य — दोनों के दाता के रूप में प्रस्तुत करती है।

Frequently Asked Questions

'अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि हनुमानजी 'अष्ट सिद्धियों (अलौकिक शक्तियों) और नौ निधियों (दिव्य कोषों) के दाता' हैं। अगली पंक्ति बताती है कि माता जानकी (सीता) ने उन्हें यह वरदान दिया — भक्तों को ऐसे आशीर्वाद देने की सामर्थ्य।
अष्ट सिद्धि और नव निधि क्या हैं?
अष्ट सिद्धि आठ अलौकिक पूर्णताएँ हैं (जैसे अणिमा — छोटा हो जाने की शक्ति, और गरिमा — भारी हो जाने की)। नव निधि धन और समृद्धि के नौ पौराणिक कोष हैं। दोनों मिलकर आध्यात्मिक प्रभुत्व तथा सांसारिक ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
माता सीता ने हनुमानजी को यह वरदान क्यों दिया?
हनुमानजी की निष्काम भक्ति और राम-सेवा से प्रसन्न होकर माता सीता (जानकी) ने उन्हें अष्ट सिद्धि और नौ निधि दूसरों को देने की सामर्थ्य का आशीर्वाद दिया। अतः जो भक्त हनुमानजी को प्रसन्न करते हैं, वे उनके माध्यम से ये आशीर्वाद पा सकते हैं।
क्या मैं समृद्धि के लिए इस पंक्ति का पाठ कर सकता हूँ?
हाँ। क्योंकि यह हनुमानजी को सिद्धियों और निधियों के दाता रूप में नमन करती है, भक्त इसे समृद्धि, सफलता तथा शुभ मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पढ़ते हैं — आदर्श रूप से मात्र लोभ के बजाय विनम्रता और भक्ति के साथ।

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