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अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता

🕉️ hindu·📿 11× जप·🕐 मंगलवार और शनिवार की प्रातः; समृद्धि और सफलता की प्रार्थना के समय·📜 Hanuman Chalisa (chaupai)

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अर्थ

हनुमान चालीसा की यह अत्यन्त प्रिय चौपाई हनुमानजी को अष्ट सिद्धियों (योग-विभूतियों) और नौ निधियों (समृद्धि के दिव्य कोषों) के दाता के रूप में प्रकट करती है। तुलसीदासजी बताते हैं कि ऐसे वरदान देने की यह सामर्थ्य स्वयं माता जानकी (सीता) ने हनुमानजी को उनकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान-रूप में प्रदान की। समृद्धि, सफलता तथा शुभ मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस पंक्ति का व्यापक रूप से पाठ किया जाता है, क्योंकि हनुमानजी को ऐश्वर्य प्रदान करने का अधिकार प्राप्त है।

उत्पत्ति और कथा

Hanuman Chalisa (chaupai) · Tulsidas · 16th century CE

हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास उस वरदान का स्मरण करते हैं जो हनुमानजी को माता सीता से प्राप्त हुआ। परम्परा के अनुसार, सीता की खोज और लंका से उद्धार के समय उनकी असीम भक्ति और सेवा से द्रवित होकर सीता (जानकी) ने हनुमानजी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि प्रदान करने का अधिकार आशीर्वाद-रूप में दिया। यह चौपाई उसी कृपा का गुणगान करती है, हनुमानजी को आध्यात्मिक पूर्णता और सांसारिक ऐश्वर्य — दोनों के दाता के रूप में प्रस्तुत करती है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि सीता के वरदान से अष्ट सिद्धि और नौ निधि सदा हनुमानजी के अधीन रहती हैं, फिर भी वे, परम भक्त, अपने लिए कुछ नहीं रखते और सच्चे भक्तों को उदारता से प्रदान करते हैं; अनेक बताते हैं कि इस पंक्ति से हनुमानजी की उपासना के पश्चात् उनका भाग्य पलटा और चिर-संचित मनोकामनाएँ पूर्ण हुईं।

मंत्र

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अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥

Ashta Siddhi Nau Nidhi Ke Data. As Bar Deen Janaki Mata.

अर्थ:आप अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं; यह वरदान आपको माता जानकी (सीता) ने प्रदान किया है॥

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

अष्ट🔊ashtaआठ
सिद्धि🔊siddhiसिद्धियाँ, अलौकिक शक्तियाँ, आध्यात्मिक पूर्णताएँ (अष्ट सिद्धि)
नौ🔊nauनौ
निधि🔊nidhiनिधियाँ (नौ दिव्य कोष, नव-निधि)
के दाता🔊ke dataके दाता / देने वाले
अस🔊asऐसा, यह
बर🔊bar (var)वर, वरदान, आशीर्वाद
दीन🔊deen (din)दिया, प्रदान किया
जानकी🔊Janakiजानकी, राजा जनक की पुत्री सीता
माता🔊mataमाता

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता पाठ के लाभ

हनुमानजी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता रूप में आह्वान करती है — समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए पाठ की जाती है

सफलता, धन-वृद्धि और शुभ मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए की जाती है

भक्त को स्मरण कराती है कि हनुमानजी के पास माता सीता का वरदान है जिससे वे आशीर्वाद दे सकते हैं

हनुमानजी की निष्काम सेवा का स्मरण कर भक्ति को गहरा करती है, जिसने सीता की कृपा अर्जित की

भौतिक कल्याण और आध्यात्मिक सिद्धि — दोनों को आकर्षित करने वाली मानी जाती है

उत्थान और सौभाग्य की प्रार्थना करने वालों की प्रिय पंक्ति

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयमंगलवार और शनिवार की प्रातः; समृद्धि और सफलता की प्रार्थना के समय

जब समृद्धि, सफलता अथवा किसी शुभ मनोकामना की पूर्ति की प्रार्थना करें, तब इस चौपाई का 11 या 21 बार पाठ करें, यह स्मरण करते हुए कि हनुमानजी माता सीता के वरदान से अष्ट सिद्धि और नौ निधि प्रदान करते हैं। लोभ के बजाय विनम्रता और भक्ति से अपनाएँ, ऐश्वर्य को शुभ कार्यों में लगाने हेतु माँगें। इसे प्रायः सम्पूर्ण हनुमान चालीसा के अंग रूप में पढ़ा जाता है और मंगलवार को विशेष शुभ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका अर्थ है कि हनुमानजी 'अष्ट सिद्धियों (अलौकिक शक्तियों) और नौ निधियों (दिव्य कोषों) के दाता' हैं। अगली पंक्ति बताती है कि माता जानकी (सीता) ने उन्हें यह वरदान दिया — भक्तों को ऐसे आशीर्वाद देने की सामर्थ्य।
अष्ट सिद्धि आठ अलौकिक पूर्णताएँ हैं (जैसे अणिमा — छोटा हो जाने की शक्ति, और गरिमा — भारी हो जाने की)। नव निधि धन और समृद्धि के नौ पौराणिक कोष हैं। दोनों मिलकर आध्यात्मिक प्रभुत्व तथा सांसारिक ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
हनुमानजी की निष्काम भक्ति और राम-सेवा से प्रसन्न होकर माता सीता (जानकी) ने उन्हें अष्ट सिद्धि और नौ निधि दूसरों को देने की सामर्थ्य का आशीर्वाद दिया। अतः जो भक्त हनुमानजी को प्रसन्न करते हैं, वे उनके माध्यम से ये आशीर्वाद पा सकते हैं।
हाँ। क्योंकि यह हनुमानजी को सिद्धियों और निधियों के दाता रूप में नमन करती है, भक्त इसे समृद्धि, सफलता तथा शुभ मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पढ़ते हैं — आदर्श रूप से मात्र लोभ के बजाय विनम्रता और भक्ति के साथ।

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