अथातो भक्तिं व्याख्यास्यामः — Word-by-Word Meaning
अथातो भक्तिं व्याख्यास्यामः
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
अथ
atha
अब (शिष्य के योग्य हो जाने पर उपदेश के आरम्भ का सूचक मंगल-शब्द)
अतः
ataḥ
इसलिए, अतः (क्योंकि भक्ति परम लक्ष्य का साधन है)
भक्तिम्
bhaktim
भक्ति, ईश्वर के प्रति प्रेममयी भक्ति (जिसका अब व्याख्यान किया जाएगा)
व्याख्यास्यामः
vyākhyāsyāmaḥ
हम व्याख्यान करेंगे, हम समझाएँगे (बहुवचन में, क्योंकि ऋषि गुरु-परम्परा की ओर से बोलते हैं)
अथ अतः
atha ataḥ
अब, इसलिए — पारम्परिक आरम्भ-वाक्य जो दर्शाता है कि इस उपदेश के लिए उचित समय और अधिकारी शिष्य आ चुके हैं
भक्तिं व्याख्यास्यामः
bhaktiṃ vyākhyāsyāmaḥ
हम अब भक्ति के स्वरूप का व्याख्यान करेंगे (सम्पूर्ण ग्रन्थ का विषय)
अथातो
athāto
अब इसलिए (अथ + अतः सन्धि में जुड़कर) — ब्रह्मसूत्र के समान मंगलमय एवं संयोजक आरम्भ
व्याख्या
vyākhyā
व्याख्या, विस्तृत विवेचन (व्याख्यास्यामः क्रिया का मूल)
सा तु अस्मिन् परमप्रेमरूपा
sā tu asmin parama-prema-rūpā
वह (भक्ति) उस (प्रभु) के प्रति परम प्रेम के स्वरूप वाली है — सूत्र २, भक्ति की परिभाषा
अमृतस्वरूपा च
amṛta-svarūpā ca
और वह अमृत के स्वरूप वाली है (अमर, आनन्दमय अवस्था) — सूत्र ३
Complete Translation
अब, इसलिए, हम भक्ति का (स्वरूप का) व्याख्यान करेंगे। (१) वह (भक्ति) उस (भगवान) के प्रति परम प्रेम के स्वरूप वाली है। (२) और वह अमृत-स्वरूपा (अमरता एवं आनन्द के स्वरूप वाली) है। (३)
Origin & History
Source: Narada Bhakti Sutra, Sutra 1
Author: Attributed to Devarshi Narada
Period: Ancient (classical period of the Bhakti tradition)
नारद भक्ति सूत्र, महान् दार्शनिक ग्रन्थों की भाँति, 'अथ अतः' — 'अब, इसलिए' — शब्दों से आरम्भ होता है। (परम्परा में) यह स्थापित कर देने के बाद कि साधक निम्न प्रवृत्तियों से विमुख होकर परम के लिए तैयार है, ऋषि नारद घोषित करते हैं कि वे अब भक्ति — प्रभु के प्रति प्रेममयी भक्ति का मार्ग — का व्याख्यान करेंगे। यह एक ही उद्घाटन सूत्र सम्पूर्ण ग्रन्थ का विषय निर्धारित कर देता है, जो आगे चलकर भक्ति को परम प्रेम के स्वरूप रूप में परिभाषित करता है और उसे वह साधन दर्शाता है जिससे मनुष्य पूर्ण, अमर एवं परम तृप्त हो जाता है।
Frequently Asked Questions
'अथातो भक्तिं व्याख्यास्यामः' का क्या अर्थ है?▼
इसका अर्थ है 'अब, इसलिए, हम भक्ति का व्याख्यान करेंगे।' यह नारद भक्ति सूत्र का सर्वप्रथम सूत्र है, जो घोषित करता है कि ऋषि अब भक्ति — ईश्वर के प्रति प्रेममयी भक्ति — के स्वरूप का विवेचन करेंगे।
यह ग्रन्थ 'अथ अतः' (अब, इसलिए) से क्यों आरम्भ होता है?▼
'अथ अतः' अनेक संस्कृत शास्त्रों — जैसे ब्रह्मसूत्र और योगसूत्र — में प्रयुक्त एक पारम्परिक, मंगलमय आरम्भ है। 'अथ' (अब) सूचित करता है कि उचित समय और अधिकारी शिष्य आ चुके हैं; 'अतः' (इसलिए) कारण से जोड़ता है — कि भक्ति परम लक्ष्य का साधन है।
नारद कौन हैं और नारद भक्ति सूत्र क्या है?▼
नारद प्रसिद्ध देवर्षि एवं भक्त हैं, जो लोकों में भ्रमण करते हुए प्रभु की महिमा का गान करते हैं। नारद भक्ति सूत्र उन्हें प्रदान किया गया सूत्रों का एक संक्षिप्त ग्रन्थ है, जो भक्ति को परिभाषित करता है, उसके रूपों एवं फलों का वर्णन करता है और प्रेममयी भक्ति को परम मार्ग घोषित करता है।
सूत्र में 'हम व्याख्यान करेंगे' बहुवचन में क्यों कहा गया है?▼
बहुवचन 'व्याख्यास्यामः' (हम व्याख्यान करेंगे) विनम्रता एवं परम्परा का चिह्न है: ऋषि केवल अपने नाम से नहीं, अपितु भक्ति के समस्त गुरु-वंश की ओर से बोलते हैं, जिन्होंने इस सत्य को साक्षात् किया और प्रदान किया है।
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