अथातो ब्रह्मजिज्ञासा — Word-by-Word Meaning
अथातो ब्रह्मजिज्ञासा
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Brahma Sutra (Vedanta Sutra) 1.1.1
Author: Sage Badarayana (traditionally identified with Vyasa)
Period: Ancient (classical period of Vedanta)
ब्रह्मसूत्र, अन्य महान् दार्शनिक ग्रन्थों की भाँति, 'अथ अतः' — 'अब, इसलिए' — शब्दों से आरम्भ होता है। भाष्यकार बताते हैं कि 'अब' उस समय को सूचित करता है जब साधक चतुष्टय-साधन-सम्पत्ति — विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति, एवं मुमुक्षुत्व — प्राप्त कर चुका हो, और 'इसलिए' कारण को सूचित करता है: यह देखकर कि कर्म के फल अनित्य हैं, मनुष्य नित्य की ओर मुड़ता है। इसके साथ महर्षि बादरायण अपने सम्पूर्ण ग्रन्थ का विषय घोषित करते हैं — ब्रह्म की जिज्ञासा। तत्पश्चात् अगला सूत्र ब्रह्म को उस रूप में परिभाषित करता है जिससे इस जगत् की उत्पत्ति एवं स्थिति होती है।
Frequently Asked Questions
'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' का क्या अर्थ है?▼
ब्रह्मसूत्र क्या है?▼
यह 'अथ अतः' (अब, इसलिए) से क्यों आरम्भ होता है?▼
'जिज्ञासा' क्या है?▼
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