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ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम् — Word-by-Word Meaning

ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम्

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

ओम् इति
om iti
ओम् — यह अक्षर, इस प्रकार
एतत् अक्षरम्
etat akṣaram
यह अविनाशी अक्षर (अक्षर का अर्थ 'अविनाशी' भी है)
इदम् सर्वम्
idam sarvam
यह सब, यह सम्पूर्ण जगत्
तस्य उपव्याख्यानम्
tasya upavyākhyānam
उसकी व्याख्या, उसका विवरण
भूतम्
bhūtam
भूतकाल
भवत्
bhavat
वर्तमान
भविष्यत्
bhaviṣyat
भविष्य
इति सर्वम्
iti sarvam
इस प्रकार यह सब
ओङ्कारः एव
oṁkāraḥ eva
केवल ओम् (ओंकार) ही है
यत् च अन्यत्
yat ca anyat
और जो कुछ अन्य है
त्रिकालातीतम्
trikālātītam
तीनों कालों (भूत, वर्तमान, भविष्य) से परे
तत् अपि ओङ्कारः एव
tad api oṁkāraḥ eva
वह भी केवल ओम् ही है

Complete Translation

ओम् — यह अक्षर (अविनाशी) ही यह सब कुछ है। इसकी व्याख्या यह है — जो कुछ भूत, वर्तमान और भविष्य है, वह सब ओंकार ही है। और जो कुछ अन्य है, जो तीनों कालों से परे है, वह भी ओंकार ही है।

Origin & History

Source: Mandukya Upanishad, Verse 1

Author: Traditional (Upanishadic)

Period: Vedic / Upanishadic

माण्डूक्य उपनिषद्, यद्यपि प्रधान उपनिषदों में सबसे संक्षिप्त है, फिर भी सर्वोच्च आदर का पात्र है; मुक्तिका उपनिषद् घोषित करता है कि एक उत्सुक साधक की मुक्ति के लिए अकेला माण्डूक्य ही पर्याप्त है। यह इस श्लोक से आरम्भ होता है जो ओम् को समस्त काल में सम्पूर्ण सत्ता घोषित करता है, फिर आत्मा के चार पादों — जाग्रत (वैश्वानर), स्वप्न (तैजस), सुषुप्ति (प्राज्ञ) और परम चतुर्थ (तुरीय) — के माध्यम से इस अक्षर का अर्थ खोलता है। इस प्रकार प्रथम श्लोक वेदान्त के ओम् और चेतना पर सबसे गहन ध्यानों में से एक की भूमिका तैयार करता है।

Frequently Asked Questions

ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम् का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'ओम् — यह अविनाशी अक्षर ही यह सब कुछ है'। यह श्लोक घोषित करता है कि सम्पूर्ण जगत्, भूत-वर्तमान-भविष्य सहित, और जो कालातीत है, वह सब पवित्र अक्षर ओम् है, जो परम सत्ता ब्रह्म का प्रतीक है।
यह श्लोक कहाँ से आया है?
यह माण्डूक्य उपनिषद् का सर्वप्रथम श्लोक है, जो अथर्ववेद से सम्बन्धित है। केवल बारह मन्त्रों वाला माण्डूक्य प्रधान उपनिषदों में सबसे छोटा है और पूर्णतः ओम् के अर्थ एवं चेतना की चार अवस्थाओं को समर्पित है।
ओम् को 'यह सब कुछ' क्यों कहा गया है?
ओम् को वह आदि ध्वनि माना जाता है जिससे समस्त नाम-रूप उत्पन्न होते हैं, और यह ब्रह्म की ध्वनि-रूप में निकटतम अभिव्यक्ति है। चूँकि ब्रह्म समस्त काल में विद्यमान सबका मूल तत्त्व है, उपनिषद् घोषित करता है कि उसका प्रतीक ओम् भी यह सम्पूर्ण जगत् और कालातीत सब कुछ है।
ओम् का चेतना की अवस्थाओं से क्या सम्बन्ध है?
माण्डूक्य उपनिषद् बताता है कि ओम् की तीन ध्वनियाँ — अ, उ और म — जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्थाओं के अनुरूप हैं, जबकि ओम् के पश्चात् का मौन तुरीय अर्थात् चौथी, शुद्ध आत्मा का प्रतीक है। अतः ओम् का ध्यान साधक को परिवर्तनशील अवस्थाओं से अपरिवर्तनशील ब्रह्म की ओर ले जाता है।

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