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अयम् आत्मा ब्रह्म PDF

अयम् आत्मा ब्रह्म की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

सर्वं ह्येतद् ब्रह्म अयम् आत्मा ब्रह्म । सोऽयम् आत्मा चतुष्पात् ॥

sarvaṁ hyetad brahma ayam ātmā brahma so'yam ātmā catuṣpāt

यह सब निश्चय ही ब्रह्म है। यह आत्मा ही ब्रह्म है। यही आत्मा चार पादों (अवस्थाओं) वाली है — जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय (चौथी अवस्था) जो शुद्ध चैतन्यस्वरूप है और जिसका साक्षात्कार करना है।