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अयि शतखण्डविखण्डित PDF

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अयि शतखण्डविखण्डितरुण्डवितुण्डितशुण्डगजाधिपते रिपुगजगण्डविदारणचण्डपराक्रमशुण्ड मृगाधिपते । निजभुजदण्डनिपातितखण्डविपातितमुण्डभटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥

Ayi shatakhandavikhanditarundavitunditashundagajadhipate Ripugajagandavidaranachandaparakramashunda mrigadhipate Nijabhujadandanipatitakhandavipatitamundabhatadhipate Jaya jaya he mahishasuramardini ramyakapardini shailasute

हे देवी, जिसने सैकड़ों खण्डों में दैत्य-गजों को विदीर्ण कर उनके शुण्ड काट डाले और मुण्ड छेद डाले; जो शत्रु-गजों के गण्डस्थल को चीरने वाली प्रचण्ड पराक्रमी सिंहवाहिनी है; जिसने अपने भुजदण्डों से दैत्य-योद्धाओं के अधिपतियों को गिराकर उनके सिर काट डाले — जय जय हे महिषासुरमर्दिनि, रम्यकपर्दिनि, शैलसुते!