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आयुः कर्म च वित्तं च — Complete Lyrics

आयुः कर्म च वित्तं च

Sanskrit text with English transliteration and translation

आयुः कर्म वित्तं विद्या निधनमेव च। पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः॥
āyuḥ karma ca vittaṁ ca vidyā nidhanam eva ca। pañcaitāni hi sṛjyante garbhasthasyaiva dehinaḥ॥
आयु, कर्म (नियत कार्य), धन, विद्या और मृत्यु — ये पाँचों बातें जीव के गर्भ में रहते ही निश्चित हो जाती हैं। चाणक्य सिखाते हैं कि जीवन की मूल रूपरेखा जन्म से पहले ही तय हो जाती है, इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति न तो सौभाग्य पर अभिमान करता है और न ही नियत बातों की चिन्ता में टूटता है।

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