श्रीमद्भगवद्गीता १.२८ — कृपया परयाऽऽविष्टो — Word-by-Word Meaning
श्रीमद्भगवद्गीता १.२८ — कृपया परयाऽऽविष्टो
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
अर्जुनः उवाच
arjunaḥ uvācha
अर्जुन ने कहा
कृपया परया
kṛipayā parayā
गहन करुणा से; अत्यन्त दया से अभिभूत
आविष्टः
āviṣhṭaḥ
अभिभूत; भरा हुआ
विषीदन्
viṣhīdan
विलाप करते हुए; शोक करते हुए
इदम् अब्रवीत्
idam abravīt
ये वचन बोले
दृष्ट्वा
dṛiṣhṭvā
देखकर
इमम्
imam
इन
स्वजनम्
sva-janam
स्वजनों को; अपने लोगों को
कृष्ण
kṛiṣhṇa
हे कृष्ण
युयुत्सुम्
yuyutsum
युद्ध की इच्छा रखने वाले
समुपस्थितम्
samupasthitam
उपस्थित; एकत्र
Complete Translation
संजय ने कहा -- अत्यन्त करुणा से अभिभूत और शोकाकुल अर्जुन ये वचन बोले -- हे कृष्ण! युद्ध की इच्छा से यहाँ उपस्थित अपने इन स्वजनों को देखकर...
Origin & History
Source: Bhagavad Gita Chapter 1, Verse 28
Author: Sage Veda Vyasa (Mahabharata, Bhishma Parva)
Period: Ancient (text compiled c. 5th–2nd century BCE)
प्रथम अध्याय 'अर्जुन विषाद योग' में, दोनों सेनाओं का निरीक्षण कर और अपने स्वजनों को पहचानकर अर्जुन करुणा और शोक से अभिभूत हो जाते हैं। संजय धृतराष्ट्र को सुनाते हैं कि किस प्रकार शोकाकुल अर्जुन श्रीकृष्ण को सम्बोधित करने लगे -- यही वह विलाप का आरम्भ है जो भगवान के गीता-उपदेश को प्रेरित करता है।
Frequently Asked Questions
भगवद्गीता १.२८ में क्या वर्णन है?▼
इसमें अर्जुन को अपने ही स्वजनों को युद्ध के लिए एकत्र और उत्सुक देखकर गहन करुणा और शोक से अभिभूत होते दर्शाया गया है। शोक से भरे अर्जुन श्रीकृष्ण से बोलने लगते हैं, और यहीं से उनका वह विलाप आरम्भ होता है जो प्रथम अध्याय में चलता रहता है।
अर्जुन यहाँ इतने करुणामय क्यों हैं?▼
अर्जुन को शत्रु नहीं, बल्कि अपने ही परिवार, गुरुजन और मित्र एक-दूसरे का विनाश करने को तत्पर दिखते हैं। उनका श्रेष्ठ हृदय उनके लिए दया से भर उठता है, जो आसक्ति और शोक के साथ मिलकर वह नैतिक संकट उत्पन्न करती है जिसका समाधान गीता देती है।
यह श्लोक गीता की केन्द्रीय समस्या का आरम्भ कैसे करता है?▼
यह श्लोक अर्जुन के शोक-प्रवाह के आरम्भ का चिह्न है। आगे के श्लोकों में व्यक्त उनका करुणा-प्रेरित युद्ध से इनकार ही वह संकट है जिसे श्रीकृष्ण कर्तव्य, अविनाशी आत्मा और भक्ति के अपने उपदेश से सुलझाते हैं।
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