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श्रीमद्भगवद्गीता १.३७ — तस्मान्नार्हा वयं हन्तुम् PDF

श्रीमद्भगवद्गीता १.३७ — तस्मान्नार्हा वयं हन्तुम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्। स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव॥

tasmān nārhā vayaṁ hantuṁ dhārtarāṣhṭrān sa-bāndhavān sva-janaṁ hi kathaṁ hatvā sukhinaḥ syāma mādhava

इसलिए हे माधव! अपने बान्धव धृतराष्ट्र-पुत्रों को मारना हमारे लिए उचित नहीं है; क्योंकि अपने ही स्वजनों को मारकर हम कैसे सुखी हो सकते हैं?