श्रीमद्भगवद्गीता १८.७ — नियतस्य तु संन्यासः — Word-by-Word Meaning
श्रीमद्भगवद्गीता १८.७ — नियतस्य तु संन्यासः
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
नियतस्य
niyatasya
नियत; अनिवार्य (कर्म) का
तु
tu
परन्तु
संन्यासः
sannyāsaḥ
संन्यास; त्याग
कर्मणः
karmaṇaḥ
कर्म का; कर्तव्य का
न उपपद्यते
na upapadyate
उचित नहीं है; शोभा नहीं देता
मोहात्
mohāt
मोह के कारण
तस्य परित्यागः
tasya parityāgaḥ
उसका परित्याग
तामसः
tāmasaḥ
तामस स्वभाव का (अज्ञान का)
परिकीर्तितः
parikīrtitaḥ
कहा गया है; घोषित किया गया है
Complete Translation
परन्तु नियत (कर्तव्य) कर्म का त्याग करना उचित नहीं है; मोहवश उसका परित्याग तामस (अज्ञान के मोड में) कहा गया है।
Origin & History
Source: Bhagavad Gita Chapter 18, Verse 7
Author: Sage Veda Vyasa (Mahabharata, Bhishma Parva)
Period: Ancient (text compiled c. 5th–2nd century BCE)
अठारहवें अध्याय, मोक्ष संन्यास योग में, श्रीकृष्ण अर्जुन के प्रश्न के उत्तर में संन्यास और त्याग का सच्चा अर्थ समझाते हैं। यहाँ वे सिखाते हैं कि नियत कर्तव्य का मोहवश त्याग तामसिक है, यह स्थापित करते हुए कि सच्चा संन्यास आसक्ति का त्याग है, स्वयं कर्तव्य का नहीं।
Frequently Asked Questions
भगवद्गीता १८.७ संन्यास के विषय में क्या सिखाती है?▼
श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि अपने नियत, अनिवार्य कर्तव्यों का त्याग कभी नहीं करना चाहिए। ऐसे कर्तव्य का मोहवश त्याग तामस (अज्ञान के गुण में) है, अतः अनुचित है।
'नियत कर्म' क्या है?▼
'नियत कर्म' का अर्थ है नियत अथवा अनिवार्य कर्तव्य — वे कर्म जिन्हें मनुष्य अपने स्वभाव और स्थिति के अनुसार उचित रूप से करने को बाध्य है। गीता सिखाती है कि मोक्ष के अभिलाषी को भी इन्हें त्यागना नहीं, अपितु करना चाहिए।
तामसिक संन्यास क्या है?▼
तामसिक संन्यास मोह, भ्रम अथवा परिश्रम से बचने की इच्छा से अपने कर्तव्य का त्याग है। चूँकि यह ज्ञान के बजाय अज्ञान से उत्पन्न होता है, गीता इसे तमोगुण (अन्धकार) में किया गया त्याग कहती है, सच्चा त्याग नहीं।
गीता के अनुसार सच्चा त्याग क्या है?▼
सच्चा त्याग (त्याग), जैसा श्रीकृष्ण इस अध्याय में बताते हैं, अपने कर्तव्यों को करते हुए उनके फल की आसक्ति को छोड़ देना है। मनुष्य पूर्ण मनोयोग से कर्म करता है, परन्तु फल को भगवान को समर्पित कर देता है, इच्छा और अहंकार से मुक्त रहकर।
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