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श्रीमद्भगवद्गीता १८.७२ — कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ PDF

श्रीमद्भगवद्गीता १८.७२ — कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा।कच्चिदज्ञानसंमोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय॥

kachchid etach chhrutaṁ pārtha tvayaikāgreṇa chetasā kachchid ajñāna-sammohaḥ pranaṣhṭas te dhanañjaya

हे पार्थ! क्या तुमने इसे एकाग्र चित्त से सुना? हे धनञ्जय! क्या तुम्हारा अज्ञानजनित मोह नष्ट हो गया?