श्रीमद्भगवद्गीता ८.६ — यं यं वापि स्मरन्भावं — Complete Lyrics
श्रीमद्भगवद्गीता ८.६ — यं यं वापि स्मरन्भावं
Sanskrit text with English transliteration and translation
यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्।
तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः॥
yaṁ yaṁ vāpi smaran bhāvaṁ tyajatyante kalevaram
taṁ tam evaiti kaunteya sadā tad-bhāva-bhāvitaḥ
हे कौन्तेय ! (यह जीव) अन्तकाल में जिस किसी भी भाव को स्मरण करता हुआ शरीर को त्यागता है, वह सदैव उस भाव के चिन्तन के फलस्वरूप उसी भाव को ही प्राप्त होता है।।
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