भगवती दुर्गा दुर्गार्तिनाशिनी (निशुम्भ-वध) PDF
भगवती दुर्गा दुर्गार्तिनाशिनी (निशुम्भ-वध) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
ततो भगवती क्रुद्धा दुर्गा दुर्गार्तिनाशिनी । चिच्छेद देवी चक्राणि स्वशरैः सायकांश्च तान् ॥
tato bhagavatī kruddhā durgā durgārtināśinī ciccheda devī cakrāṇi svaśaraiḥ sāyakāṃśca tān
तब क्रुद्ध भगवती दुर्गा, दुर्गति और दुस्तर पीड़ाओं का नाश करने वाली, ने अपने बाणों से उन चक्रों और बाणों को काट डाला। पीड़ा देने वाला निशुम्भ जब हाथ में शूल लिए आगे बढ़ा, तब चण्डिका ने वेग से फेंके गए शूल से उसके हृदय को बेध दिया। शूल से बिंधे उसके हृदय से एक और महाबली, महापराक्रमी पुरुष 'ठहर!' कहता हुआ निकला। उसके निकलते ही देवी ने अट्टहास करके खड्ग से उसका सिर काट डाला; तब वह भूमि पर गिर पड़ा।
शूलहस्तं समायान्तं निशुम्भममरार्दनम् । हृदि विव्याध शूलेन वेगाविद्धेन चण्डिका ॥
śūlahastaṃ samāyāntaṃ niśumbhamamarārdanam hṛdi vivyādha śūlena vegāviddhena caṇḍikā
भिन्नस्य तस्य शूलेन हृदयान्निःसृतोऽपरः । महाबलो महावीर्यस्तिष्ठेति पुरुषो वदन् ॥
bhinnasya tasya śūlena hṛdayānniḥsṛto'paraḥ mahābalo mahāvīryastiṣṭheti puruṣo vadan
तस्य निष्क्रामतो देवी प्रहस्य स्वनवत्ततः । शिरश्चिच्छेद खड्गेन ततोऽसावपतद्भुवि ॥
tasya niṣkrāmato devī prahasya svanavattataḥ śiraściccheda khaḍgena tato'sāvapatadbhuvi