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भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः PDF

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भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः नवाम्बुभिर्भूमिविलम्बिनो घनाः। अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥

bhavanti namrās taravaḥ phalodgamaiḥ navāmbubhir bhūmi-vilambino ghanāḥ। anuddhatāḥ sat-puruṣāḥ samṛddhibhiḥ svabhāva evaiṣa paropakāriṇām॥

वृक्ष फलों के भार से झुक जाते हैं; नवीन जल से भरे हुए मेघ पृथ्वी की ओर झुककर नीचे आ जाते हैं; और सज्जन पुरुष समृद्धि पाकर भी अनुद्धत (अहंकाररहित) बने रहते हैं — क्योंकि यह विनम्रता ही परोपकारी जनों का सहज स्वभाव है। भर्तृहरि प्रकृति का दृष्टान्त देकर दिखाते हैं कि सच्ची महानता अहंकार से नहीं, बल्कि नम्रता से प्रकट होती है।