भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो PDF
भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो॥
Bho Shambho Shiva Shambho Svayambho
हे शम्भो, मंगलमय शिव, स्वयम्भू!
गङ्गाधर शङ्कर करुणाकर मामव भवसागरतारक॥ भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो॥
Gangadhara Shankara Karunakara Mam-Ava Bhava-Sagara-Taraka Bho Shambho Shiva Shambho Svayambho
हे गंगाधर, हे शंकर, हे करुणा के आगार — मेरी रक्षा कीजिए, हे संसार-सागर से पार उतारने वाले! भो शम्भो, शिव शम्भो, स्वयम्भो!
निर्गुण परब्रह्मस्वरूप गगनाकार अखण्ड अमेय॥ भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो॥
Nirguna Para-Brahma-Svarupa Gagana-Akara Akhanda Ameya Bho Shambho Shiva Shambho Svayambho
हे निर्गुण परब्रह्मस्वरूप, आकाश के समान निराकार और सर्वव्यापी, अखण्ड और अमेय! भो शम्भो, शिव शम्भो, स्वयम्भो!
नित्य निरामय निष्कलरूप निजगुहनिहित नितान्त अनन्त॥ भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो॥
Nitya Niramaya Nishkala-Rupa Nija-Guha-Nihita Nitanta Ananta Bho Shambho Shiva Shambho Svayambho
हे नित्य, निरामय, निष्कलरूप, अपने ही हृदय-गुहा में निहित, नितान्त अनन्त! भो शम्भो, शिव शम्भो, स्वयम्भो!
कैवल्यपते परमशिवेश्वर परमानन्दतनो प्रणतार्तिहर॥ भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो॥
Kaivalya-Pate Parama-Shiv-Eshvara Parama-Ananda-Tano Pranata-Arti-Hara Bho Shambho Shiva Shambho Svayambho
हे कैवल्य के स्वामी, परमशिवेश्वर, हे परमानन्दस्वरूप, प्रणाम करने वालों की पीड़ा हरने वाले! भो शम्भो, शिव शम्भो, स्वयम्भो!