बोधोऽन्यसाधनेभ्यो हि (आत्मबोध २) PDF
बोधोऽन्यसाधनेभ्यो हि (आत्मबोध २) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
बोधोऽन्यसाधनेभ्यो हि साक्षान्मोक्षैकसाधनम्। पाकस्य वह्निवज्ज्ञानं विना मोक्षो न सिध्यति॥
bodho'nya-sādhanebhyo hi sākṣān mokṣaika-sādhanam | pākasya vahnivaj jñānaṃ vinā mokṣo na sidhyati ||
अन्य समस्त साधनों की अपेक्षा ज्ञान ही साक्षात् मोक्ष का एकमात्र साधन है। जैसे अग्नि के बिना भोजन पकाना सम्भव नहीं, वैसे ही ज्ञान के बिना मोक्ष सिद्ध नहीं होता।