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ब्रह्मविद् ब्रह्मैव भवति PDF

ब्रह्मविद् ब्रह्मैव भवति की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

स यो ह वै तत्परमं ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति नास्याब्रह्मवित्कुले भवति । तरति शोकं तरति पाप्मानं गुहाग्रन्थिभ्यो विमुक्तोऽमृतो भवति ॥

sa yo ha vai tat paramaṁ brahma veda brahmaiva bhavati nāsyābrahmavit kule bhavati tarati śokaṁ tarati pāpmānaṁ guhāgranthibhyo vimukto'mṛto bhavati

जो उस परम ब्रह्म को जान लेता है, वह स्वयं ब्रह्म ही हो जाता है; उसके कुल में कोई भी ब्रह्म को न जानने वाला उत्पन्न नहीं होता। वह शोक को पार कर जाता है, पाप को पार कर जाता है, और हृदय की गाँठों से मुक्त होकर अमर हो जाता है।