चला लक्ष्मीश्चलाः प्राणाः PDF
चला लक्ष्मीश्चलाः प्राणाः की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
चला लक्ष्मीश्चलाः प्राणाश्चलं जीवितयौवनम्। चलाचलमिदं सर्वं कीर्तिर्यस्य स जीवति॥
calā lakṣmīś calāḥ prāṇāś calaṁ jīvita-yauvanam। calācalam idaṁ sarvaṁ kīrtir yasya sa jīvati॥
लक्ष्मी (धन) चंचल है, प्राण चंचल हैं, जीवन और यौवन भी चंचल हैं; यह सम्पूर्ण संसार चलायमान और अस्थिर है — केवल वही सचमुच जीवित रहता है जिसकी कीर्ति (सुयश) स्थायी होती है। यह श्लोक सिखाता है कि चूँकि समस्त सांसारिक वस्तुएँ नश्वर हैं, अतः श्रेष्ठ कर्मों से अर्जित चिरस्थायी कीर्ति ही जीवन को सच्चा अर्थ देती है।