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छठ पूजा सूर्य अर्घ्य मंत्र (जपाकुसुमसङ्काशं) — Complete Lyrics

छठ पूजा सूर्य अर्घ्य मंत्र (जपाकुसुमसङ्काशं)

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
Japa-Kusuma-Sankasham Kashyapeyam Mahadyutim Tamo'rim Sarva-papaghnam Pranato'smi Divakaram
मैं दिवाकर सूर्य को प्रणाम करता हूँ, जो जपा (अड़हुल) के पुष्प के समान आभा वाले, कश्यप के पुत्र, महाद्युतिमान, अंधकार के शत्रु और समस्त पापों के नाशक हैं। ॐ, हम भास्कर को जानें, महातेजस्वी का ध्यान करें — वह आदित्य हमें प्रेरित एवं प्रकाशित करें। ॐ सूर्याय नमः; ॐ घृणिः सूर्याय नमः।
Verse 2
भास्कराय विद्महे महाद्युतिकराय धीमहि। तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्॥
Om Bhaskaraya Vidmahe Mahadyuti-karaya Dhimahi Tanno Adityah Prachodayat
Verse 3
सूर्याय नमः। घृणिः सूर्याय नमः॥
Om Suryaya Namah. Om Ghrinih Suryaya Namah

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