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छठ पूजा सूर्य अर्घ्य मंत्र (जपाकुसुमसङ्काशं) — Word-by-Word Meaning

छठ पूजा सूर्य अर्घ्य मंत्र (जपाकुसुमसङ्काशं)

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

जपाकुसुमसङ्काशम्
Japa-Kusuma-Sankasham
जपा (अड़हुल) के पुष्प के समान देदीप्यमान आभा वाले
काश्यपेयम्
Kashyapeyam
कश्यप (एवं अदिति) के पुत्र
महाद्युतिम्
Mahadyutim
महान् तेज एवं कान्ति वाले
तमोऽरिम्
Tamo'rim
अंधकार के शत्रु (भीतरी एवं बाहरी समस्त अंधकार के नाशक)
सर्वपापघ्नम्
Sarva-papaghnam
समस्त पापों के नाशक
प्रणतोऽस्मि
Pranato'smi
मैं प्रणाम करता हूँ, मैं नमन करता हूँ
दिवाकरम्
Divakaram
दिवाकर, दिन के कर्ता (सूर्य) को
भास्कराय विद्महे
Bhaskaraya Vidmahe
हम भास्कर (प्रकाश के कर्ता, सूर्य) को जानें
महाद्युतिकराय धीमहि
Mahadyuti-karaya Dhimahi
महातेजस्वी का हम ध्यान करें
तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्
Tanno Adityah Prachodayat
वह आदित्य (सूर्य) हमें प्रेरित एवं प्रकाशित करें
ॐ सूर्याय नमः
Om Suryaya Namah
ॐ, सूर्य, सूर्यदेव को नमस्कार
ॐ घृणिः सूर्याय नमः
Om Ghrinih Suryaya Namah
ॐ, करुणामय, तेजस्वी सूर्य को नमस्कार (सूर्य बीज-आह्वान)

Complete Translation

मैं दिवाकर सूर्य को प्रणाम करता हूँ, जो जपा (अड़हुल) के पुष्प के समान आभा वाले, कश्यप के पुत्र, महाद्युतिमान, अंधकार के शत्रु और समस्त पापों के नाशक हैं। ॐ, हम भास्कर को जानें, महातेजस्वी का ध्यान करें — वह आदित्य हमें प्रेरित एवं प्रकाशित करें। ॐ सूर्याय नमः; ॐ घृणिः सूर्याय नमः।

Origin & History

Source: Traditional Surya worship mantras (the Japa-Kusuma dhyana, Surya Gayatri and Surya bija) used in the Chhath Puja arghya

Author: Traditional (the Surya Gayatri from the Gayatri tradition)

Period: Classical / traditional

छठ पूजा सूर्य उपासना का एक प्राचीन चार दिवसीय पर्व है, जो विशेषतः बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं नेपाल में अत्यन्त प्रिय है, और कार्तिक की षष्ठी (छठे दिन) को मनाया जाता है। व्रती कठोर उपवास करते हैं, प्रायः निर्जल, और जल में खड़े होकर अस्ताचल एवं उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देते हैं, अपने परिवार के आरोग्य एवं समृद्धि की प्रार्थना करते हुए। सूर्यदेव, प्रत्यक्ष देवता एवं समस्त जीवन के स्रोत, इन प्रसिद्ध श्लोकों — जपा-कुसुम ध्यान, सूर्य गायत्री एवं 'ॐ सूर्याय नमः' — सहित, छठी मैया की उपासना के साथ आह्वान किए जाते हैं।

Frequently Asked Questions

छठ अर्घ्य के समय कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
अर्घ्य देते समय प्रसिद्ध सूर्य ध्यान 'जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्...' का पाठ किया जाता है, साथ ही सूर्य गायत्री ('ॐ भास्कराय विद्महे...') तथा सरल 'ॐ सूर्याय नमः'। ये सूर्य को अंधकार के नाशक एवं समस्त पापों के संहारक रूप में सम्मानित करते हैं।
छठ पूजा में दो अर्घ्य क्यों दिए जाते हैं?
षष्ठी की सायं अस्ताचल सूर्य को सन्ध्या अर्घ्य दिया जाता है, और अगली प्रातः उदयाचल सूर्य को उषा अर्घ्य। अस्त एवं उदय दोनों सूर्य की उपासना जीवन के सम्पूर्ण चक्र के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है और छठ की अनूठी विशेषता है।
छठी मैया कौन हैं?
छठी मैया वह देवी हैं जिनकी छठ में सूर्य के साथ उपासना की जाती है, जिन्हें दिव्य माता का रूप (प्रायः षष्ठी देवी, बच्चों की रक्षिका, के रूप में पहचानी जाती हैं) तथा सूर्य की बहन अथवा पत्नी माना जाता है। भक्त उनसे एवं सूर्य से अपने बच्चों एवं परिवार के कल्याण व दीर्घायु की प्रार्थना करते हैं।
'जपाकुसुमसङ्काशं' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि सूर्य लाल जपा (अड़हुल) के पुष्प के समान देदीप्यमान हैं। यह श्लोक सूर्य को कश्यप के तेजस्वी पुत्र, अंधकार के शत्रु एवं समस्त पापों के नाशक रूप में नमन करता है — नित्य सूर्य उपासना के सर्वाधिक प्रिय श्लोकों में से एक।

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