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दत्त बावनी Meaning — Line by Line

दत्त बावनी

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of दत्त बावनी with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Jaya Yogishvara Datta Dayaal. Tun ja eka jagamaan pratipaal.
  2. Verse 2. Brahma-Hari-Hara-no avataar. Sharanaagata-no taaranahaar.
  3. Verse 3. Vaade gher ke raanamaan. Raho chho Chaitanya roopamaan.
  4. Verse 4. Maataa tun ne pitaa tun ja. Bandhu tun ne sakhaa tun ja.
  5. Verse 5. Tuja vina bhatakyo bahu bahu door. Have charane raakhyo jaroor.
  6. Verse 6. Veda Shaastra Puraana pramaana. Taaraka mantra e Datta-pramaana.
  7. Verse 7. Jaya jaya kaarunika Avadhoota. Taaraka tarana trigunaateeta.
  8. Verse 8. Jaya Giranaari Avadhoota. Shri Gurudatta Digambara soota.
Verse 1#

Jaya Yogishvara Datta Dayaal. Tun ja eka jagamaan pratipaal.

जय योगीश्वर दत्त दयाळ। तुं एक जगमां प्रतिपाळ॥ अत्र्यनसूया करी निमित्त। प्रगट्यो जगकारण निश्चित्त॥

Jaya Yogishvara Datta Dayaal. Tun ja eka jagamaan pratipaal. Atryanasuyaa kari nimitta. Pragatyo jagakaarana nishchitta.

Meaningहे योगियों के स्वामी दत्त, दयालु! आपकी जय हो — इस जगत् में एकमात्र आप ही पालनकर्ता हैं। अत्रि और अनसूया को निमित्त बनाकर आप निश्चय ही जगत् के कारणरूप में प्रकट हुए।

Verse 2#

Brahma-Hari-Hara-no avataar. Sharanaagata-no taaranahaar.

ब्रह्महरिहरनो अवतार। शरणागतनो तारणहार॥ अंतर्यामी सत्चितसुख। बहार धरा बहुविध सुखदुःख॥

Brahma-Hari-Hara-no avataar. Sharanaagata-no taaranahaar. Antaryaami Sat-Chit-Sukha. Bahaar dharaa bahuvidha sukha-duhkha.

Meaningआप ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अवतार हैं, शरणागत के तारणहार हैं। अन्तर्यामी रूप में आप सत्-चित्-सुख हैं; बाहर आप अनेक प्रकार के सुख-दुःख धारण करते हैं।

Verse 3#

Vaade gher ke raanamaan. Raho chho Chaitanya roopamaan.

वाडे घेर के रानमां। रहो छो चैतन्य रूपमां॥ सहाय करो सदा सर्व ठाम। अगणित रूपे अगणित नाम॥

Vaade gher ke raanamaan. Raho chho Chaitanya roopamaan. Sahaaya karo sadaa sarva thaam. Aganita roope aganita naam.

Meaningबगीचे में, घर में या वन में — आप चैतन्यरूप में विराजते हैं। आप सदा सर्वत्र सहायता करते हैं, अगणित रूपों और अगणित नामों से।

Verse 4#

Maataa tun ne pitaa tun ja. Bandhu tun ne sakhaa tun ja.

माता तुं ने पिता तुं ज। बंधु तुं ने सखा तुं ज॥ त्रिगुणातीत त्रिगुणस्वरूप। अकल अरूप ने बहुरूप॥

Maataa tun ne pitaa tun ja. Bandhu tun ne sakhaa tun ja. Trigunaateeta triguna-svaroopa. Akala aroopa ne bahuroopa.

Meaningआप ही माता और आप ही पिता हैं; आप ही बन्धु और आप ही सखा हैं। आप त्रिगुणातीत हैं फिर भी त्रिगुणस्वरूप हैं — अकल, अरूप और बहुरूप हैं।

Verse 5#

Tuja vina bhatakyo bahu bahu door. Have charane raakhyo jaroor.

तुज विण भटक्यो बहु बहु दूर। हवे चरणे राख्यो जरूर॥ प्रेमे पुकारुं दिनरात। दत्त दत्त बस एक वात॥

Tuja vina bhatakyo bahu bahu door. Have charane raakhyo jaroor. Preme pukaarun dinaraata. Datta Datta basa eka ja vaata.

Meaningआपके बिना मैं बहुत-बहुत दूर भटका; अब अवश्य मुझे अपने चरणों में रखिए। दिन-रात मैं प्रेम से पुकारता हूँ — 'दत्त, दत्त' — बस यही मेरी एक बात है।

Verse 6#

Veda Shaastra Puraana pramaana. Taaraka mantra e Datta-pramaana.

वेद शास्त्र पुराण प्रमाण। तारक मंत्र दत्तप्रमाण॥ गुरु बिन ज्ञान को पावे। दत्तकृपा विण कळावे॥

Veda Shaastra Puraana pramaana. Taaraka mantra e Datta-pramaana. Guru bina jnaana na ko paave. Datta-kripaa vina na kalaave.

Meaningवेद, शास्त्र और पुराण प्रमाण हैं; तारक मंत्र दत्त के प्रमाण से ही है। गुरु के बिना कोई ज्ञान नहीं पाता, और दत्त की कृपा के बिना वह प्रकट नहीं होता।

Verse 7#

Jaya jaya kaarunika Avadhoota. Taaraka tarana trigunaateeta.

जय जय कारुणिक अवधूत। तारक तरण त्रिगुणातीत॥ अनसूयात्मज दिगंबर। दत्त दिगंबर दत्त दिगंबर॥

Jaya jaya kaarunika Avadhoota. Taaraka tarana trigunaateeta. Anasuyaatmaja Digambara. Datta Digambara Datta Digambara.

Meaningकरुणामय अवधूत की जय हो, जय हो — तारक, तारण और त्रिगुणातीत। हे अनसूयानन्दन दिगम्बर — दत्त दिगम्बर, दत्त दिगम्बर!

Verse 8#

Jaya Giranaari Avadhoota. Shri Gurudatta Digambara soota.

जय गिरनारी अवधूत। श्री गुरुदत्त दिगंबर सूत॥ भावे भजे जे नरनार। तेने तारे भवपार॥

Jaya Giranaari Avadhoota. Shri Gurudatta Digambara soota. Bhaave bhaje je nara-naara. Tene taare e bhavapaara.

Meaningगिरनार के अवधूत की जय हो, श्री गुरुदत्त दिगम्बर सुत की जय। जो नर-नारी भाव से उनका भजन करते हैं, उन्हें वे भवसागर से पार उतार देते हैं।

Word-by-Word Breakdown

जय योगीश्वर दत्त
Jaya Yogishvara Datta
हे योगियों के स्वामी दत्त, आपकी जय हो
दयाळ
Dayaal
दयालु — करुणामय
तुं ज एक जगमां प्रतिपाळ
Tun ja eka jagamaan pratipaal
इस जगत् में एकमात्र आप ही पालनकर्ता हैं
अत्र्यनसूया करी निमित्त
Atryanasuyaa kari nimitta
अत्रि और अनसूया को (अपने जन्म का) निमित्त बनाकर
प्रगट्यो जगकारण
Pragatyo jaga-kaarana
आप जगत् के कारणरूप में प्रकट हुए
ब्रह्महरिहरनो अवतार
Brahma-Hari-Hara-no avataar
ब्रह्मा, विष्णु (हरि) और शिव (हर) के अवतार
शरणागतनो तारणहार
Sharanaagata-no taaranahaar
शरणागत सबके तारणहार
अंतर्यामी
Antaryaami
अन्तर्यामी — सबके भीतर निवास करने वाले अन्तर्यामी
सत्चितसुख
Sat-Chit-Sukha
सत्-चित्-सुख स्वरूप — सत्, चित् और आनन्दमय
रहो छो चैतन्य रूपमां
Raho chho Chaitanya roopamaan
आप चैतन्यरूप में विराजते हैं (घर, बगीचे या वन में समान रूप से)
अगणित रूपे अगणित नाम
Aganita roope aganita naam
अगणित रूपों में और अगणित नामों से
माता तुं ने पिता तुं ज
Maataa tun ne pitaa tun ja
आप ही माता और आप ही पिता हैं
त्रिगुणातीत त्रिगुणस्वरूप
Trigunaateeta triguna-svaroopa
त्रिगुणातीत होकर भी त्रिगुणस्वरूप
अकल अरूप ने बहुरूप
Akala aroopa ne bahuroopa
अकल, अरूप फिर भी बहुरूप
तुज विण भटक्यो बहु बहु दूर
Tuja vina bhatakyo bahu bahu door
आपके बिना मैं बहुत-बहुत दूर भटका
हवे चरणे राख्यो जरूर
Have charane raakhyo jaroor
अब अवश्य मुझे अपने चरणों में रखिए
तारक मंत्र ए दत्तप्रमाण
Taaraka mantra e Datta-pramaana
तारक मंत्र दत्त के अपने प्रमाण से सिद्ध है
गुरु बिन ज्ञान न को पावे
Guru bina jnaana na ko paave
गुरु के बिना कोई सच्चा ज्ञान नहीं पाता
जय जय कारुणिक अवधूत
Jaya jaya kaarunika Avadhoota
करुणामय अवधूत की जय, जय
अनसूयात्मज दिगंबर
Anasuyaatmaja Digambara
हे अनसूयानन्दन दिगम्बर
दत्त दिगंबर दत्त दिगंबर
Datta Digambara Datta Digambara
दत्त दिगम्बर, दत्त दिगम्बर (दत्त परम्परा का महान् ध्रुवपद)
जय गिरनारी अवधूत
Jaya Giranaari Avadhoota
गिरनार के अवधूत की जय

Origin & History

Source: Datta-sampradaya devotional literature; composed in Gujarati by Shri Rang Avadhoot Maharaj of Nareshwar

Author: Shri Rang Avadhoot Maharaj (Pandurang Vitthal Valame), 1898–1968

Period: 20th century

श्री रंग अवधूत महाराज एक प्रसिद्ध दत्त-भक्त थे, जिन्होंने नर्मदा के तट पर नारेश्वर में अपना आश्रम स्थापित किया। भगवान् दत्तात्रेय के प्रति अपने प्रगाढ़ प्रेम के कारण उन्होंने दत्त बावनी की रचना की — सरल, उत्कट गुजराती में बावन चरण, जो दत्त को सर्वपालक, करुणामय अवधूत और त्रिमूर्ति के साक्षात् स्वरूप के रूप में पूर्ण शरणागति उँडेलते हैं। यह स्तोत्र भक्तों में शीघ्र फैल गया और अब विशेषतः गुजरात और महाराष्ट्र में असंख्य घरों और दत्त मन्दिरों में शरण, रक्षा तथा सद्गुरु की कृपा की प्रार्थना के रूप में प्रतिदिन पढ़ा जाता है।

Frequently Asked Questions

दत्त बावनी क्या है?
दत्त बावनी भगवान् दत्तात्रेय को समर्पित बावन (बावनी = 52) चरणों का एक भक्ति-स्तोत्र है, जिसकी रचना नारेश्वर के श्री रंग अवधूत महाराज ने गुजराती में की। यह दत्त को करुणामय अवधूत और ब्रह्मा, विष्णु व शिव के एकत्व के रूप में महिमामंडित करता है, और उनकी शरण व कृपा की प्रार्थना करता है।
दत्त बावनी की रचना किसने की?
इसकी रचना बीसवीं शताब्दी के संत गुजरात के नारेश्वर के श्री रंग अवधूत महाराज (पाण्डुरंग विट्ठल वालमे) ने की, जो भगवान् दत्तात्रेय के महान् भक्त थे। तब से यह गुजरात और महाराष्ट्र में सबसे अधिक गाए जाने वाले दत्त स्तोत्रों में से एक बन गया है।
दत्त बावनी के पाठ के क्या लाभ हैं?
भक्त इसे रक्षा, संकट व भय के निवारण और गुरुकृपा के लिए पढ़ते हैं। यह दत्त के प्रति पूर्ण शरणागति जगाता है और विशेषतः विपत्ति के समय, गुरुवार तथा दत्त जयन्ती को इसका पाठ किया जाता है।
दत्त बावनी का पाठ कब करना चाहिए?
गुरु के दिन गुरुवार को और दत्त जयन्ती (मार्गशीर्ष की पूर्णिमा) को यह सर्वाधिक शुभ है। अनेक भक्त इसे भगवान् दत्तात्रेय की प्रातः या सायंकालीन प्रार्थना के रूप में प्रतिदिन पढ़ते हैं।

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