श्रीदत्तात्रेय स्तोत्रम् PDF
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जटाधरं पाण्डुराङ्गं शूलहस्तं कृपानिधिम्। सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे॥
Jataadharam Paanduraangam Shoola-hastam Kripaa-nidhim Sarva-roga-haram Devam Dattaatreyam-aham Bhaje
मैं भगवान् दत्तात्रेय का भजन करता हूँ — जो जटाधारी हैं, श्वेत (भस्मलिप्त) देहवाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, करुणा के निधान और समस्त रोगों को हरने वाले देव हैं॥
जगदुत्पत्तिकर्त्रे च स्थितिसंहारहेतवे। भवपाशविमुक्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१॥
Jagad-utpatti-kartre Cha Sthiti-samhaara-hetave Bhava-paasha-vimuktaaya Dattaatreya Namo'stu Te (1)
जो जगत् की उत्पत्ति के कर्ता, स्थिति और संहार के हेतु, तथा भव-पाश से मुक्त करने वाले हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
जराजन्मविनाशाय देहशुद्धिकराय च। दिगम्बरदयामूर्ते दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥२॥
Jaraa-janma-vinaashaaya Deha-shuddhi-karaaya Cha Digambara-dayaa-moorte Dattaatreya Namo'stu Te (2)
जो जरा और जन्म का नाश करने वाले, देह को शुद्ध करने वाले, दिगम्बर दया की मूर्ति हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
कर्पूरकान्तिदेहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च। वेदशास्त्रपरिज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥३॥
Karpoora-kaanti-dehaaya Brahma-moorti-dharaaya Cha Veda-shaastra-parijnaaya Dattaatreya Namo'stu Te (3)
जिनकी देह कर्पूर-सी कान्तिमान है, जो ब्रह्म की मूर्ति धारण किए, वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
ह्रस्वदीर्घकृशस्थूल-नामगोत्र-विवर्जित। पञ्चभूतैकदीप्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥४॥
Hrasva-deergha-krisha-sthoola-naama-gotra-vivarjita Pancha-bhootaika-deeptaaya Dattaatreya Namo'stu Te (4)
जो ह्रस्व-दीर्घ, कृश-स्थूल तथा नाम-गोत्र से रहित हैं, और पञ्चभूतों में एकमात्र ज्योति-रूप से प्रकाशित हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
यज्ञभोक्ते च यज्ञाय यज्ञरूपधराय च। यज्ञप्रियाय सिद्धाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥५॥
Yajna-bhokte Cha Yajnaaya Yajna-roopa-dharaaya Cha Yajna-priyaaya Siddhaaya Dattaatreya Namo'stu Te (5)
जो यज्ञ के भोक्ता, यज्ञस्वरूप, यज्ञ का रूप धारण करने वाले, यज्ञप्रिय और सिद्ध हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः। मूर्तित्रयस्वरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥६॥
Aadau Brahmaa Madhye Vishnur-ante Devah Sadaashivah Moorti-traya-svaroopaaya Dattaatreya Namo'stu Te (6)
जो आदि में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अन्त में सदाशिव हैं — उन त्रिमूर्तिस्वरूप को — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
भोगालयाय भोगाय योगयोग्याय धारिणे। जितेन्द्रियजितज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥७॥
Bhogaalayaaya Bhogaaya Yoga-yogyaaya Dhaarine Jitendriya-jita-jnaaya Dattaatreya Namo'stu Te (7)
जो भोग के आलय और भोगस्वरूप, योग के योग्य तथा सबके धारक, जितेन्द्रिय और ज्ञान के विजेता हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
दिगम्बराय दिव्याय दिव्यरूपधराय च। सदोदितपरब्रह्म दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥८॥
Digambaraaya Divyaaya Divya-roopa-dharaaya Cha Sadodita-para-brahma Dattaatreya Namo'stu Te (8)
जो दिगम्बर, दिव्य, दिव्यरूपधारी और सदा उदित परब्रह्म हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
जम्बूद्वीपमहाक्षेत्रमातापुरनिवासिने। जयमानसतां देव दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥९॥
Jamboo-dveepa-mahaa-kshetra-maataa-pura-nivaasine Jaya-maanasataam Deva Dattaatreya Namo'stu Te (9)
जो जम्बूद्वीप के महाक्षेत्र मातापुर (माहुर) में निवास करते हैं, हे भक्तों के मन को जीतने वाले देव — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
भिक्षाटनं गृहे ग्रामे पात्रं हेममयं करे। नानास्वादमयी भिक्षा दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१०॥
Bhikshaatanam Grihe Graame Paatram Hema-mayam Kare Naanaa-svaada-mayee Bhikshaa Dattaatreya Namo'stu Te (10)
जो गाँव में घर-घर भिक्षाटन करते हैं, हाथ में स्वर्णपात्र लिए, जिनकी भिक्षा नाना स्वादों वाली है — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वस्त्रे चाकाशभूतले। प्रज्ञानघनबोधाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥११॥
Brahma-jnaana-mayee Mudraa Vastre Cha-aakaasha-bhootale Prajnaana-ghana-bodhaaya Dattaatreya Namo'stu Te (11)
जिनकी मुद्रा ब्रह्मज्ञानमयी है, जिनका वस्त्र आकाश और आसन पृथ्वी है, जो प्रज्ञानघन बोधस्वरूप हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
अवधूतसदानन्दपरब्रह्मस्वरूपिणे। विदेहदेहरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१२॥
Avadhoota-sadaananda-para-brahma-svaroopine Videha-deha-roopaaya Dattaatreya Namo'stu Te (12)
जो अवधूत, सदानन्द परब्रह्मस्वरूप, तथा विदेह (देहरहित) रूपवाले हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
सत्यरूपसदाचारसत्यधर्मपरायण। सत्याश्रयपरोक्षाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१३॥
Satya-roopa-sadaachaara-satya-dharma-paraayana Satyaashraya-parokshaaya Dattaatreya Namo'stu Te (13)
जो सत्यरूप, सदाचारी, सत्यधर्म में तत्पर, सत्य के आश्रय और परोक्ष (इन्द्रियातीत) हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
शूलहस्तगदापाणे वनमालासुकन्धर। यज्ञसूत्रधरब्रह्मन् दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१४॥
Shoola-hasta-gadaa-paane Vana-maalaa-su-kandhara Yajna-sootra-dhara-brahman Dattaatreya Namo'stu Te (14)
जो हाथ में त्रिशूल और गदा धारण किए, गले में वनमाला से सुशोभित, यज्ञोपवीतधारी ब्रह्मन् हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
क्षराक्षरस्वरूपाय परात्परतराय च। दत्तमुक्तिपरस्तोत्र दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१५॥
Ksharaakshara-svaroopaaya Paraat-para-taraaya Cha Datta-mukti-para-stotra Dattaatreya Namo'stu Te (15)
जो क्षर और अक्षर स्वरूप तथा परात्पर हैं, हे मुक्ति प्रदान करने वाले परम स्तोत्र — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
दत्त विद्याढ्यलक्ष्मीश दत्त स्वात्मस्वरूपिणे। गुणनिर्गुणरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१६॥
Datta Vidyaadhya-lakshmeesha Datta Svaatma-svaroopine Guna-nirguna-roopaaya Dattaatreya Namo'stu Te (16)
हे दत्त, विद्यारूपी लक्ष्मी के स्वामी, हे दत्त, जो आत्मस्वरूप तथा सगुण-निर्गुण रूपवाले हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
शत्रुनाशकरं स्तोत्रं ज्ञानविज्ञानदायकम्। सर्वपापं शमं याति दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥१७॥
Shatru-naasha-karam Stotram Jnaana-vijnaana-daayakam Sarva-paapam Shamam Yaati Dattaatreya Namo'stu Te (17)
यह स्तोत्र शत्रुओं का नाश करने वाला तथा ज्ञान-विज्ञान का दाता है; इससे समस्त पाप शान्त हो जाते हैं — हे दत्तात्रेय, आपको नमस्कार॥
इदं स्तोत्रं महद्दिव्यं दत्तप्रत्यक्षकारकम्। दत्तात्रेयप्रसादाच्च नारदेन प्रकीर्तितम्॥१८॥
Idam Stotram Mahad-divyam Datta-pratyaksha-kaarakam Dattaatreya-prasaadaach-cha Naaradena Prakeertitam (18)
यह महान् दिव्य स्तोत्र दत्त के प्रत्यक्ष दर्शन कराने वाला है; दत्तात्रेय की कृपा से इसे नारद ने प्रकीर्तित किया॥