श्रीदत्तात्रेय वज्रकवचम् PDF
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ॐ दत्तात्रेय शिरः पातु सहस्राब्जेषु संस्थितः। भालं पात्वानसूयेयश्चन्द्रमण्डलमध्यगः॥
Om Dattaatreya Shirah paatu Sahasraabjeshu samsthitah. Bhaalam paatv-Anasuyeyash-Chandra-mandala-madhya-gah.
ॐ। सहस्रदल कमल में विराजमान भगवान् दत्तात्रेय मेरे सिर की रक्षा करें; चन्द्रमण्डल के मध्य में स्थित अनसूयानन्दन मेरे भाल की रक्षा करें॥
कूर्चं मनोमयः पातु हं क्षं द्विदलपद्मभूः। ज्योतीरूपोऽक्षिणी पातु पातु शब्दात्मकः श्रुती॥
Koorcham mano-mayah paatu Ham Ksham dvi-dala-padma-bhooh. Jyoti-roopo'kshinee paatu paatu shabdaatmakah shrutee.
जो मनःस्वरूप, हं-क्षं बीजों सहित द्विदल कमल में उदित हैं, वे भ्रूमध्य की रक्षा करें; ज्योतिःस्वरूप मेरे नेत्रों की रक्षा करें, और शब्दात्मक मेरे कानों की रक्षा करें॥
नासिकां पातु गन्धात्मा मुखं पातु रसात्मकः। जिह्वां वेदात्मकः पातु दन्तोष्ठौ पातु धार्मिकः॥
Naasikaam paatu gandhaatmaa mukham paatu rasaatmakah. Jihvaam vedaatmakah paatu dantoshthau paatu dhaarmikah.
गन्धात्मक मेरी नासिका की रक्षा करें; रसात्मक मेरे मुख की रक्षा करें; वेदात्मक मेरी जिह्वा की रक्षा करें; और धार्मिक मेरे दाँत-ओठों की रक्षा करें॥
कपोलावत्रिभूः पातु पात्वशेषं ममात्मवित्। सर्वाङ्गं पातु सर्वेशः सर्वगः सर्वतोमुखः॥
Kapolaav-Atri-bhooh paatu paatv-ashesham mam-aatma-vit. Sarvaangam paatu Sarveshah Sarva-gah sarvato-mukhah.
अत्रिनन्दन मेरे कपोलों की रक्षा करें, और मेरा आत्मवेत्ता शेष समस्त की रक्षा करें; सर्वव्यापी, सर्वतोमुख सर्वेश मेरे सम्पूर्ण अंग की रक्षा करें॥
रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु। तत्सर्वं मे सदा पातु दत्तात्रेयो दिगम्बरः॥
Rakshaa-heenam tu yat-sthaanam varjitam kavachena tu. Tat-sarvam me sadaa paatu Dattaatreyo Digambarah.
जो भी स्थान रक्षारहित रह गया और इस कवच द्वारा छूट गया — उन सबकी सदा रक्षा दिगम्बर दत्तात्रेय करें॥
इन्द्रादिदिक्षु मां पातु शङ्खचक्रगदाधरः। वज्रिणं वारुणीशं च पातु पाशधरो हरिः॥
Indraadi-dikshu maam paatu Shankha-chakra-gadaa-dharah. Vajrinam Vaaruneesham cha paatu paasha-dharo Harih.
शंख-चक्र-गदाधारी इन्द्रादि दिशाओं में मेरी रक्षा करें; पाशधारी हरि वहाँ रक्षा करें जहाँ वज्रधारी (इन्द्र) और वरुणेश विराजते हैं॥
इदं तु कवचं दिव्यं वज्रकल्पं महाद्भुतम्। दत्तात्रेयस्य योगीन्द्र नारदाय पुरा जगौ॥
Idam tu kavacham divyam vajra-kalpam mahaadbhutam. Dattaatreyasya yogeendra Naaradaaya puraa jagau.
यह दिव्य, महाद्भुत, वज्र के समान दृढ़ कवच — योगीन्द्र दत्तात्रेय का वज्रकवच है — जिसे प्राचीन काल में नारद को सुनाया गया था॥