धराधरेन्द्रनन्दिनीविलासबन्धु PDF
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धराधरेन्द्र नन्दिनी विलासबन्धु बन्धुर स्फुरद्दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे । कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद्दिगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥
Dharadharendra nandini vilasabandhu bandhura Sphuraddiganta santati pramoda manamanase Kripakatakshadhorani niruddha durdharapadi Kvachiddigambare manovinodametu vastuni
पर्वतराजपुत्री (पार्वती) के विलास के बन्धु एवं मनोहर, समस्त दिशाओं की दीप्त परम्परा में आनन्दित मन वाले, जिनकी कृपाकटाक्ष की अविरल धारा दुर्धर आपदाओं को रोक देती है — उन दिगम्बर शिव की उस सत्ता में मेरा मन विनोद पाए।