धूमावती स्तोत्रम् (धूमावत्यष्टकम्) — Word-by-Word Meaning
धूमावती स्तोत्रम् (धूमावत्यष्टकम्)
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Tantric Shakta tradition; preserved in the Shaktapramoda and Mantramaharnava compilations
Author: Traditional (anonymous); transmitted in the Mahavidya / Dhumavati tantras
Period: Medieval Tantric period
एक सुप्रसिद्ध कथा के अनुसार धूमावती तब प्रकट हुईं जब सती भूख सहन न कर पाने पर स्वयं शिव को निगल गईं; जब शिव ने मुक्त होने की प्रार्थना की, तो वे उस धुएँ से विधवा-देवी रूप में प्रकट हुईं — सदा क्षुधातुर और सांसारिक दृष्टि से अमंगल किन्तु परम ज्ञानमयी। सातवीं महाविद्या रूप में वे उस महान शून्य का प्रतिनिधित्व करती हैं जो समस्त रूपों के विलीन होने पर शेष रहता है। धूमावत्यष्टक उनकी उपासना में प्रयुक्त प्रमुख स्तोत्र है, जो उनके उग्र, धूम्र रूप को हर संकट दूर करने हेतु आवाहित करता है।
Frequently Asked Questions
धूमावती कौन हैं?▼
इस स्तोत्र में देवी दिन भर में रूप क्यों बदलती हैं?▼
क्या गृहस्थ के लिए धूमावती स्तोत्र का पाठ सुरक्षित है?▼
फलश्रुति क्या वचन देती है?▼
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