ध्यायेदाजानुबाहुं (श्रीराम ध्यान) PDF
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ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम्॥
Dhyayed ajanu-bahum dhrita-shara-dhanusham baddha-padmasanastham, Pitam vaso vasanam nava-kamala-dala-spardhi-netram prasannam, Vamankarudha-sita-mukha-kamala-milal-lochanam niradabham, Nanalankara-diptam dadhatam uru-jata-mandalam ramachandram.
श्रीरामचन्द्र का इस प्रकार ध्यान करना चाहिए — जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी हैं, जो धनुष-बाण धारण किए हैं, पद्मासन में दृढ़ बैठे हैं, पीताम्बर पहने हैं, जिनके प्रसन्न नेत्र नवीन कमलदल से स्पर्धा करते हैं; जिनकी दृष्टि बायीं गोद में बैठी सीता के मुख-कमल से मिल रही है; जो मेघ के समान श्याम-कान्तिमान हैं, अनेक आभूषणों से दीप्त हैं, और विशाल जटा-मण्डल धारण किए हैं।