ध्यायेदाजानुबाहुं (श्रीराम ध्यान)
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✦ अर्थ
यह श्रीराम की पूजा और रामरक्षा स्तोत्र के पूर्व पढ़ा जाने वाला शास्त्रीय ध्यान-श्लोक है, जो भगवान राम का पूर्ण ध्यानात्मक चित्र प्रस्तुत करता है। यह उन्हें आजानुबाहु और कमलनयन, धनुष-बाणधारी, पद्मासन में बायीं गोद में सीता सहित विराजमान, मेघश्याम और जटामुकुटधारी रूप में चित्रित करता है। इस छवि का ध्यान प्रार्थना से पूर्व राम के शान्त, राजसी रूप को हृदय में स्थिर कर देता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional dhyana shloka of Sri Rama, recited as the meditation verse preceding the Ramaraksha Stotra and Rama worship · Traditional (associated with the Ramaraksha Stotra tradition of Budha Kaushika) · Classical / medieval devotional period
ध्यान-श्लोक पूजा से पूर्व देवता के रूप को मन में स्थापित करते हैं, और यह श्लोक राम के लिए वही भूमिका निभाता है। प्रसिद्ध रामरक्षा स्तोत्र से पूर्व रखा गया यह श्लोक राम के शुभ चिह्नों को एकत्र करता है — आजानु भुजाएँ, कमल-नेत्र, धनुष-बाण, पद्मासन, पीताम्बर, मेघश्याम वर्ण और जटा-मुकुट — साथ ही उनकी गोद में सीता को, जिससे भक्त को ध्यान करने के लिए सीता-राम की एक पूर्ण छवि प्राप्त होती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
रामरक्षा परम्परा के भक्त मानते हैं कि स्तोत्र पढ़ने से पूर्व राम के इस रूप का ध्यान करने से उपासक भगवान के संरक्षण से घिर जाता है, क्योंकि परम्परा कहती है कि ऐसे प्रेममय चिन्तन से प्रसन्न होकर राम स्वयं अपने भक्त को प्रत्येक भय से वैसे ही बचाते हैं जैसे उनके नाम और रूप ने स्वप्न में रामरक्षा प्राप्त करने वाले ऋषि की रक्षा की थी।
मंत्र
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ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम्॥
Dhyayed ajanu-bahum dhrita-shara-dhanusham baddha-padmasanastham, Pitam vaso vasanam nava-kamala-dala-spardhi-netram prasannam, Vamankarudha-sita-mukha-kamala-milal-lochanam niradabham, Nanalankara-diptam dadhatam uru-jata-mandalam ramachandram.
अर्थ:श्रीरामचन्द्र का इस प्रकार ध्यान करना चाहिए — जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी हैं, जो धनुष-बाण धारण किए हैं, पद्मासन में दृढ़ बैठे हैं, पीताम्बर पहने हैं, जिनके प्रसन्न नेत्र नवीन कमलदल से स्पर्धा करते हैं; जिनकी दृष्टि बायीं गोद में बैठी सीता के मुख-कमल से मिल रही है; जो मेघ के समान श्याम-कान्तिमान हैं, अनेक आभूषणों से दीप्त हैं, और विशाल जटा-मण्डल धारण किए हैं।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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ध्यायेदाजानुबाहुं (श्रीराम ध्यान) पाठ के लाभ
ध्यान के लिए सीता सहित श्रीराम का पूर्ण, राजसी रूप मन में स्थिर करता है
रामरक्षा स्तोत्र और राम-पूजा से पूर्व पढ़ा जाने वाला मानक ध्यान-श्लोक
राम की शान्त, कृपामय उपस्थिति का आवाहन कर शान्ति और रक्षा प्रदान करता है
सीता-राम दोनों के प्रति भक्ति को गहरा करता है, जो दिव्य सामंजस्य का आदर्श है
प्रत्येक विवरण ध्यान का केन्द्र बनकर प्रार्थना और जप के लिए मन को स्थिर करता है
कमलनयन, मेघश्याम राम का ध्यान शान्ति और मंगल प्रदान करने वाला माना जाता है
ध्यायेदाजानुबाहुं (श्रीराम ध्यान) जप विधि
शान्त होकर बैठें और जप करते हुए छवि को अंग-प्रत्यंग बनाएँ — धनुष-बाण सहित लम्बी भुजाएँ, पद्मासन, पीताम्बर, कमलदल-समान प्रसन्न नेत्र, बायीं गोद में सीता, मेघश्याम रूप, आभूषण और जटा-मुकुट। रामरक्षा स्तोत्र, अन्य राम-स्तोत्रों अथवा ध्यान आरम्भ करने से पूर्व राम के रूप को मन में स्थिर करने के लिए इस ध्यान-श्लोक को एक या तीन बार पढ़ें।