राम चालीसा
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✦ अर्थ
राम चालीसा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम (रघुवीर) की चालीस छंदों वाली हिंदी स्तुति है। यह राम-नाम की अपार महिमा तथा भक्तों की रक्षा का गुणगान करती है। नित्य पाठ से रक्षा, विजय, भय-निवारण तथा हर सच्ची मनोकामना की पूर्ति होती है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional hymn · Traditional (signed 'Haridas') · Devotional era
राम चालीसा प्रिय चालीसा परम्परा की चालीस छंदों वाली हिंदी स्तुति है, जो राम को मर्यादा पुरुषोत्तम—धर्म के पूर्ण स्वरूप—के रूप में स्तुति करती है। यह सबसे बढ़कर राम-नाम की अपार महिमा पर बल देती है, जिसे वेद पुकारते हैं, जिसे शिव सदा जपते हैं, और जो भक्त को हर कठिनाई से पार कर वैकुंठ धाम तक ले जाता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
चालीसा राम-नाम की परम शक्ति का गुणगान करती है—शिव उसे सदा जपते हैं, शेषनाग उसका जप करते हुए पृथ्वी को पुष्प-समान सहज धारण करते हैं, और राम की कृपा से ही गणेश प्रथम-पूज्य हुए। इसका अंतिम वचन सीधा है—राम के चरणों में मन लगाकर इसका पाठ करो, और हर सच्ची मनोकामना पूर्ण होती है।
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श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
Shri raghubira bhakta hitakari Suni lijai prabhu araja hamari
अर्थ:हे श्री रघुवीर (राम), भक्तों के हितकारी, हे प्रभु, हमारी यह विनम्र विनती सुन लीजिए।
निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई॥
Nishi dina dhyana dharai jo koi Ta sama bhakta aura nahim hoi
अर्थ:जो कोई दिन-रात आपका ध्यान धरता है — उसके समान और कोई भक्त नहीं होता।
ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥
Dhyana dharem shivaji mana mamhi Brahma, indra para nahim pahim
अर्थ:शिव स्वयं अपने हृदय में आपका ध्यान धरते हैं; ब्रह्मा और इन्द्र भी आपका पार नहीं पाते।
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥
Duta tumhara vira hanumana Jasu prabhava tihum pura jana
अर्थ:आपके दूत वीर हनुमान हैं, जिनका प्रभाव तीनों लोकों में जाना जाता है।
जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला॥
Jaya, jaya, jaya raghunatha kripala Sada karo samtana pratipala
अर्थ:जय, जय, जय हे कृपालु रघुनाथ; सदा सन्तों का पालन करो।
तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥
Tuva bhujadanda prachanda kripala Ravana mari surana pratipala
अर्थ:आपकी भुजाएँ प्रचण्ड हैं, हे दयालु; रावण का वध करके आपने देवताओं की रक्षा की।
तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई॥
Tuma anatha ke natha gosaim Dinana ke ho sada sahai
अर्थ:आप अनाथों के नाथ हैं, हे स्वामी; सदा दीनों के सहायक हैं।
ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥
Brahmadika tava para na pavaim Sada isha tumharo yasha gavaim
अर्थ:ब्रह्मा और देवता आपका पार नहीं पाते; सदा, हे ईश, वे आपका यश गाते हैं।
चारिउ भेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी॥
Chariu bheda bharata haim sakhi Tuma bhaktana ki lajja rakhi
अर्थ:चारों वेद साक्षी हैं; आप अपने भक्तों की लाज रखते हैं।
गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहिं॥
Guna gavata sharada mana mahim Surapati tako para na pahim
अर्थ:शारदा (सरस्वती) अपने हृदय में आपके गुण गाती हैं, फिर भी इन्द्र भी आपका पार नहीं पाते।
नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं होई॥
Nama tumhara leta jo koi Ta sama dhanya aura nahim hoi
अर्थ:जो कोई आपका नाम लेता है — उससे अधिक धन्य और कोई नहीं।
राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥
Rama nama hai aparampara Charihu vedana jahi pukara
अर्थ:राम का नाम अपरम्पार है; चारों वेद इसे पुकारते हैं।
गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥
Ganapati nama tumharo linho Tinako prathama pujya tuma kinho
अर्थ:आपने गणपति (गणेश) का नाम धारण किया और उन्हें प्रथम पूज्य बनाया।
शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा॥
Shesha ratata nita nama tumhara Mahi ko bhara shisha para dhara
अर्थ:शेष (नाग) सदा आपका नाम रटते हैं, अपने शीश पर पृथ्वी का भार धारण करते हुए।
फूल समान रहत सो भारा। पावत कोऊ न तुम्हरो पारा॥
Phula samana rahata so bhara Pavata kou na tumharo para
अर्थ:वह भार उनके लिए फूल के समान हल्का रहता है; फिर भी कोई आपका पार नहीं पाता।
भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहूं न रण में हारो॥
Bharata nama tumharo ura dharo Tasom kabahum na rana mem haro
अर्थ:भरत का नाम अपने हृदय में धारण करो, और आप युद्ध में कभी पराजित नहीं होंगे।
नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥
Nama shatruhana hridaya prakasha Sumirata hota shatru kara nasha
अर्थ:शत्रुघ्न का नाम हृदय में प्रकाशित होता है; उसका स्मरण करने से शत्रु का नाश होता है।
लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी॥
Lakhana tumhare ajnakari Sada karata santana rakhavari
अर्थ:लक्ष्मण आपके आज्ञाकारी हैं, सदा सन्तों की रखवाली करते हैं।
ताते रण जीते नहिं कोई। युद्ध जुरे यमहूं किन होई॥
Tate rana jite nahim koi Yuddha jure yamahum kina hoi
अर्थ:इसलिए युद्ध में उनसे कोई नहीं जीत सकता, चाहे यम स्वयं युद्ध में जुट जाएँ।
महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा॥
Mahalakshmi dhara avatara Saba vidhi karata papa ko chhara
अर्थ:महालक्ष्मी ने (सीता रूप में) अवतार लिया और हर प्रकार से पाप को छार (राख) कर दिया।
सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥
Sita rama punita gayo Bhuvaneshvari prabhava dikhayo
अर्थ:सीता और राम पवित्र रूप में गाए गए; उन्होंने भुवनेश्वरी का प्रभाव दिखाया।
घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई॥
Ghata som prakata bhai so ai Jako dekhata chandra lajai
अर्थ:वे पृथ्वी (घट) से प्रकट हुईं, जिन्हें देखकर चन्द्रमा भी लजा जाता है।
जो तुम्हरे नित पांव पलोटत। नवो निद्धि चरणन में लोटत॥
Jo tumhare nita pamva palotata Navo niddhi charanana mem lotata
अर्थ:जो सदा आपके चरण दबाते हैं — नौ निधियाँ उनके चरणों में लोटती हैं।
सिद्धि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी॥
Siddhi atharaha mamgalakari So tuma para javai balihari
अर्थ:अठारह मंगलकारी सिद्धियाँ सदा आपकी भक्ति पर बलिहार जाती हैं।
औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई॥
Aurahu jo aneka prabhutai So sitapati tumahim banai
अर्थ:और जो भी अन्य प्रभुताएँ हैं, हे सीतापति, वे सब आपने ही बनाई हैं।
इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा॥
Ichchha te kotina samsara Rachata na lagata pala ki bara
अर्थ:आपकी मात्र इच्छा से करोड़ों संसार पल भर से भी कम में रच जाते हैं।
जो तुम्हरे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥
Jo tumhare charanana chita lavai Taki mukti avasi ho javai
अर्थ:जो आपके चरणों में चित्त लगाता है, उसकी मुक्ति निश्चय ही हो जाती है।
सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥
Sunahu rama tuma tata hamare Tumahim bharata kula pujya prachare
अर्थ:सुनो, हे राम, आप हमारे पिता हैं; भरत के कुल में आप पूज्य प्रचारित किए गए हैं।
तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥
Tumahim deva kula deva hamare Tuma guru deva prana ke pyare
अर्थ:आप हमारे देव-कुल के देव हैं; आप हमारे गुरुदेव हैं, प्राणों के प्यारे।
जो कुछ हो सो तुमहिं राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥
Jo kuchha ho so tumahim raja Jaya jaya jaya prabhu rakho laja
अर्थ:जो कुछ है, सब आपका ही है, हे राजा; जय जय जय हे प्रभु, हमारी लाज रखो।
राम आत्मा पोषण हारे। जय जय जय दशरथ के प्यारे॥
Rama atma poshana hare Jaya jaya jaya dasharatha ke pyare
अर्थ:हे राम, आत्मा के पोषणकर्ता; जय जय जय हे दशरथ के प्यारे।
जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा। नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा॥
Jaya jaya jaya prabhu jyoti svarupa Narguna brahri akhanda anupa
अर्थ:जय जय हे प्रभु, ज्योति स्वरूप; निर्गुण ब्रह्म, अखण्ड और अनूप।
सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी॥
Satya satya jaya satyavrata svami Satya sanatana antaryami
अर्थ:सत्य सत्य जय, हे सत्यव्रत स्वामी; सनातन सत्य, सबके अन्तर्यामी।
सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै॥
Satya bhajana tumharo jo gavai So nishchaya charom phala pavai
अर्थ:जो आपकी सच्ची स्तुति गाता है, वह निश्चय ही जीवन के चारों फल पाता है।
सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं॥
Satya shapatha gauripati kinhim Tumane bhaktihim saba sidhi dinhim
अर्थ:गौरीपति (शिव) ने सच्ची शपथ ली: आप भक्ति के द्वारा सब सिद्धि प्रदान करते हैं।
ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा। नमो नमो जय जगपति भूपा॥
Jnana hridaya do jnana svarupa Namo namo jaya jagapati bhupa
अर्थ:मेरे हृदय में ज्ञान दो, हे ज्ञानस्वरूप; नमो नमो, जय हे जगपति भूप।
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा॥
Dhanya dhanya tuma dhanya pratapa Nama tumhara harata samtapa
अर्थ:धन्य धन्य धन्य आपका प्रताप; आपका नाम सब सन्ताप हर लेता है।
सत्य शुद्ध देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥
Satya shuddha devana mukha gaya Baji dundubhi shamkha bajaya
अर्थ:सच्ची शुद्ध स्तुति देवताओं के मुख से गाई गई; दुन्दुभी बजी और शंख बजाए गए।
सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन-मन धन॥
Satya satya tuma satya sanatana Tuma hi ho hamare tana-mana dhana
अर्थ:सत्य सत्य आप सनातन सत्य हैं; आप ही हमारे तन, मन और धन हैं।
याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥
Yako patha kare jo koi Jnana prakata take ura hoi
अर्थ:जो कोई इसका पाठ करता है — उसके हृदय में ज्ञान स्पष्ट प्रकट होता है।
आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिव मेरा॥
Avagamana mitai tihi kera Satya vachana mane shiva mera
अर्थ:उसका आवागमन (जन्म-मरण) मिट जाता है — शिव स्वयं इसे सत्य मानते हैं।
और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई॥
Aura asa mana mem jo hoi Manavamchhita phala pave soi
अर्थ:और मन में जो भी अन्य आशा हो, वही मनवांछित फल पूरा हो जाता है।
तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥
Tinahum kala dhyana jo lyavai Tulasi dala aru phula chadha़avai
अर्थ:जो तीनों कालों में आपका ध्यान लाता है, और तुलसी दल तथा फूल चढ़ाता है —
साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्धता पावै॥
Saga patra so bhoga lagavai So nara sakala siddhata pavai
अर्थ:— और साग-पत्र का सरल भोग लगाता है — वह नर समस्त सिद्धता पा लेता है।
अन्त समय रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥
Anta samaya raghubara pura jai Jaham janma hari bhakta kahai
अर्थ:अन्त समय में वह राम के धाम जाता है, जहाँ वह हरि के भक्त रूप में जन्म लेता है।
श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥
Shri haridasa kahai aru gavai So baikuntha dhama ko pavai
अर्थ:ऐसा श्री हरिदास कहते और गाते हैं; वह वैकुण्ठ धाम को पाता है।
सात दिवस जो नेम कर,पाठ करे चित लाय। हरिदास हरि कृपा से,अवसि भक्ति को पाय॥
Sata divasa jo nema kara,patha kare chita laya Haridasa hari kripa se,avasi bhakti ko paya
अर्थ:जो एकाग्र मन से सात दिन नियम रखकर इसका पाठ करता है — हरि की कृपा से हरिदास (भक्त) निश्चय ही भक्ति पाता है।
राम चालीसा जो पढ़े,राम चरण चित लाय। जो इच्छा मन में करै,सकल सिद्ध हो जाय॥
Rama chalisa jo padha़e,rama charana chita laya Jo ichchha mana mem karai,sakala siddha ho jaya
अर्थ:जो राम चालीसा पढ़ता है, राम के चरणों में चित्त लगाकर — जो भी इच्छा मन में हो, सब सिद्ध हो जाती है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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राम चालीसा पाठ के लाभ
राम चालीसा के नित्य पाठ से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की कृपा प्राप्त होती है, जो रक्षा, विजय और धर्म प्रदान करती है।
इसे भय, शत्रु और विघ्न दूर करने तथा शांति, समृद्धि और भक्ति देने वाला माना जाता है।
चालीसा वचन देती है कि जो राम के चरणों में मन लगाकर इसका पाठ करता है, उसकी हर सच्ची मनोकामना पूर्ण होती है।
राम-नाम की महिमा का स्मरण कराती है—जिसे वेद भी पुकारते हैं और शिव सदा जपते हैं।
राम नवमी, मंगलवार तथा रामायण/सुंदरकांड पाठ के समय इसका विशेष प्रभाव होता है।
सात दिन का नियमपूर्वक पाठ हरि की कृपा से निश्चय ही भक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है।
राम चालीसा जप विधि
स्नान के पश्चात सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित श्रीराम के चित्र के सम्मुख बैठें। दीप जलाएँ, तुलसी-पत्र और पुष्प अर्पित करें, और राम के चरण-कमलों में मन लगाकर चालीसा का पाठ करें। ग्रंथ भक्ति हेतु एकाग्र सात-दिवसीय अनुष्ठान की सलाह देता है। अंत में 'श्रीराम जय राम जय जय राम' और आरती करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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