दिनयामिन्यौ सायं प्रातः PDF
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दिनयामिन्यौ सायं प्रातः शिशिरवसन्तौ पुनरायातः । कालः क्रीडति गच्छत्यायुः तदपि न मुञ्चत्याशावायुः ॥
Dinayaminyau sayam pratah shishiravasantau punarayatah Kalah kridati gachchhatyayuh tadapi na munchatyashavayuh
दिन-रात, सायं-प्रातः, शिशिर-वसन्त बार-बार आते-जाते हैं; काल क्रीड़ा करता है और आयु बीतती जाती है — फिर भी आशा-रूपी वायु नहीं छोड़ती।