दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् PDF
दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
ॐ दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी। दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी॥
om durgā durgārti-śamanī durgāpad-vinivāriṇī | durgama-cchedinī durga-sādhinī durga-nāśinī ||
ॐ। दुर्गा; कठिनाइयों से उत्पन्न पीड़ा को शान्त करने वाली; दुर्गम विपत्तियों का निवारण करने वाली; दुर्गम का छेदन करने वाली; दुष्कर को सिद्ध करने वाली; समस्त संकटों का नाश करने वाली।
दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा। दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला॥
durgato-ddhāriṇī durga-nihantrī durgamāpahā | durgama-jñāna-dā durga-daitya-loka-davānalā ||
विपत्ति में पड़े जनों का उद्धार करने वाली; कष्ट की संहारिणी; दुर्गम को हरने वाली; दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली; अजेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल समान।
दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी। दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता॥
durgamā durgamālokā durgamātma-svarūpiṇī | durgamārga-pradā durgama-vidyā durgamāśritā ||
दुर्गमा; जिनका दर्शन भी कठिन है; जिनका स्वरूप ही दुर्गम आत्मतत्त्व है; दुर्गम मार्ग को दिखाने वाली; दुर्लभ विद्या स्वरूपा; शरणागतों की आश्रयदात्री।
नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः। पठेत्सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः॥
nāmāvalim imāṃ yastu durgāyā mama mānavaḥ | paṭhet sarva-bhayān mukto bhaviṣyati na saṃśayaḥ ||
जो मनुष्य दुर्गा के इन बारह नामों की इस नाममाला का पाठ करता है, वह समस्त भयों से मुक्त हो जाता है — इसमें कोई संशय नहीं।