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दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 12× जप·🕐 नवरात्रि में, मंगलवार और शुक्रवार को, तथा भय, संकट या विपत्ति के किसी भी क्षण में·📜 Traditional Devi stotra (recited within the Durga Saptashati / Devi Mahatmyam tradition)

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अर्थ

दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् देवी दुर्गा के बारह पवित्र नामों की एक संक्षिप्त किन्तु प्रभावशाली नामावली है, जिसका प्रत्येक नाम 'दुर्गा' से आरम्भ होकर यह बताता है कि वे किस प्रकार हर कठिनाई, संकट और दैत्य का नाश करती हैं। यह इस आश्वासन के साथ समाप्त होता है कि जो भी इस नाममाला का पाठ करेगा वह निःसंदेह समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा। दुर्गा सप्तशती की परम्परा से सम्बद्ध यह स्तोत्र भय एवं संकट के समय तथा नवरात्रि में नित्य पाठ हेतु सरलता से कण्ठस्थ हो जाने वाला रक्षाकवच माना जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Devi stotra (recited within the Durga Saptashati / Devi Mahatmyam tradition) · Traditional (Puranic) · Ancient / Classical

दुर्गा द्वादशनाम — 'दुर्गा के बारह नाम' — शाक्त परम्परा का एक प्रिय रक्षा-स्तोत्र है, जो दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के साथ पढ़ा जाता है। इसके नाम माता को प्रत्येक 'दुर्ग' — प्रत्येक दुर्ग, प्रत्येक कठिनाई, प्रत्येक दुस्तर संकट — के विजेता रूप में तथा दैत्यों के संहारक एवं मुक्तिदायी ज्ञान के दाता रूप में स्मरण कराते हैं। संकट के प्रत्येक युग में भक्तों ने इस संक्षिप्त नामावली की शरण ली है, इसके अपने ही वचन पर विश्वास करते हुए कि इसका पाठ समस्त भयों से मुक्त कर देता है।

शास्त्रों में वर्णित

परम्परागत रूप से कहा जाता है कि जो विपत्ति से अभिभूत हैं — कारावास, रोग, ऋण, शत्रुओं का भय अथवा मृत्यु का आतंक — और जो श्रद्धापूर्वक दुर्गा के इन बारह नामों का पाठ करते हैं, उनके संकट विलीन हो जाते हैं, क्योंकि स्तोत्र स्वयं वचन देता है कि पाठक 'समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा, इसमें संशय नहीं'।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी। दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी॥

om durgā durgārti-śamanī durgāpad-vinivāriṇī | durgama-cchedinī durga-sādhinī durga-nāśinī ||

अर्थ:ॐ। दुर्गा; कठिनाइयों से उत्पन्न पीड़ा को शान्त करने वाली; दुर्गम विपत्तियों का निवारण करने वाली; दुर्गम का छेदन करने वाली; दुष्कर को सिद्ध करने वाली; समस्त संकटों का नाश करने वाली।

श्लोक 2

दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा। दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला॥

durgato-ddhāriṇī durga-nihantrī durgamāpahā | durgama-jñāna-dā durga-daitya-loka-davānalā ||

अर्थ:विपत्ति में पड़े जनों का उद्धार करने वाली; कष्ट की संहारिणी; दुर्गम को हरने वाली; दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली; अजेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल समान।

श्लोक 3

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी। दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता॥

durgamā durgamālokā durgamātma-svarūpiṇī | durgamārga-pradā durgama-vidyā durgamāśritā ||

अर्थ:दुर्गमा; जिनका दर्शन भी कठिन है; जिनका स्वरूप ही दुर्गम आत्मतत्त्व है; दुर्गम मार्ग को दिखाने वाली; दुर्लभ विद्या स्वरूपा; शरणागतों की आश्रयदात्री।

श्लोक 4

नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः। पठेत्सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति संशयः॥

nāmāvalim imāṃ yastu durgāyā mama mānavaḥ | paṭhet sarva-bhayān mukto bhaviṣyati na saṃśayaḥ ||

अर्थ:जो मनुष्य दुर्गा के इन बारह नामों की इस नाममाला का पाठ करता है, वह समस्त भयों से मुक्त हो जाता है — इसमें कोई संशय नहीं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

दुर्गा🔊durgāदुर्गा — अजेय, दुर्गम, कठिनाइयों की निवारिणी; दिव्य माता (पहला नाम)
दुर्गार्तिशमनी🔊durgārti-śamanīदुर्गार्तिशमनी — कठिनाइयों (दुर्ग) से उत्पन्न पीड़ा (आर्ति) को शान्त करने वाली (दूसरा नाम)
दुर्गापद्विनिवारिणी🔊durgāpad-vinivāriṇīदुर्गापद्विनिवारिणी — दुर्गम (दुस्तर) विपत्तियों का निवारण करने वाली (तीसरा नाम)
दुर्गमच्छेदिनी🔊durgama-cchedinīदुर्गमच्छेदिनी — दुर्गम एवं अलंघ्य का छेदन करने वाली (चौथा नाम)
दुर्गसाधिनी🔊durga-sādhinīदुर्गसाधिनी — दुष्कर/दुर्लभ को सिद्ध करने वाली (पाँचवाँ नाम)
दुर्गनाशिनी🔊durga-nāśinīदुर्गनाशिनी — कठिनाइयों एवं संकटों का नाश करने वाली (छठा नाम)
दुर्गतोद्धारिणी🔊durgato-ddhāriṇīदुर्गतोद्धारिणी — विपत्ति में पड़े जनों का उद्धार करने वाली (सातवाँ नाम)
दुर्गनिहन्त्री🔊durga-nihantrīदुर्गनिहन्त्री — कष्ट एवं विघ्नरूपी दैत्य की संहारिणी (आठवाँ नाम)
दुर्गमापहा🔊durgamāpahāदुर्गमापहा — दुर्गम बाधा को दूर करने वाली (नौवाँ नाम)
दुर्गमज्ञानदा🔊durgama-jñāna-dāदुर्गमज्ञानदा — दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली (दसवाँ नाम)
दुर्गदैत्यलोकदवानला🔊durga-daitya-loka-davānalāदुर्गदैत्यलोकदवानला — अजेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल समान (ग्यारहवाँ नाम)
दुर्गमा🔊durgamāदुर्गमा — अगम्य/दुर्गम देवी (बारहवाँ नाम)
दुर्गमात्मस्वरूपिणी🔊durgamātma-svarūpiṇīदुर्गमात्मस्वरूपिणी — जिनका स्वरूप ही दुर्गम परम आत्मा है
दुर्गमार्गप्रदा🔊durga-mārga-pradāदुर्गमार्गप्रदा — मोक्ष का दुर्गम मार्ग दिखाने वाली
नामावलिम् इमां यः पठेत्🔊nāmāvalim imāṃ yaḥ paṭhetजो इस नाममाला का पाठ करता है
सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति🔊sarva-bhayān mukto bhaviṣyatiसमस्त भयों से मुक्त हो जाता है
न संशयः🔊na saṃśayaḥइसमें कोई संशय नहीं

दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् पाठ के लाभ

देवी दुर्गा के बारह पवित्र नामों का आवाहन करता है, जिनमें से प्रत्येक उनकी कठिनाई एवं संकट पर शक्ति को पुकारता है

स्तोत्र स्वयं अपने पाठक को समस्त भयों (सर्व-भय) से मुक्ति का वचन देता है

दैनिक रक्षात्मक पाठ हेतु एक लघु, सरलता से कण्ठस्थ होने वाली नामावली

परम्परागत रूप से संकट, रोग, ऋण, शत्रु और घोर विपत्ति के समय में पढ़ा जाता है

साहस तथा प्रतीत होती असंभव बाधाओं पर विजय प्रदान करता है

नवरात्रि में तथा देवी के दिनों — मंगलवार और शुक्रवार — को विशेष रूप से प्रभावशाली

दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या12बार
उत्तम समयनवरात्रि में, मंगलवार और शुक्रवार को, तथा भय, संकट या विपत्ति के किसी भी क्षण में

स्नान के पश्चात माँ दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष लाल पुष्प, कुमकुम और घी का दीप लेकर बैठें। बारह नामों का श्रद्धापूर्वक धीरे-धीरे पाठ करें, आदर्शतः प्रतिदिन अथवा नवरात्रि में 12 / 108 बार। चूँकि अन्तिम श्लोक समस्त भय से मुक्ति का वचन देता है, इसे परम्परागत रूप से किसी भी अचानक भय या विपत्ति में तुरन्त पढ़ा जाता है। माता की रक्षा की प्रार्थना के साथ समाप्त करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह देवी दुर्गा के बारह (द्वादश) पवित्र नामों को सूचीबद्ध करने वाला स्तोत्र है। प्रत्येक नाम 'दुर्गा' से आरम्भ होता है और उनकी कठिनाई पर विजय, दैत्य-संहार तथा भक्तों की रक्षा करने की शक्ति की स्तुति करता है। यह देवी परम्परा का एक लघु, अत्यन्त प्रिय रक्षा-स्तोत्र है।
इसका अन्तिम श्लोक घोषित करता है कि जो भी दुर्गा के नामों की इस नाममाला का पाठ करता है वह 'समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा — इसमें कोई संशय नहीं' (सर्व-भयान् मुक्तो भविष्यति न संशयः)। इसी कारण इसे विशेष रूप से संकट और विपत्ति के समय पढ़ा जाता है।
दोनों ही दुर्गा के नामों की नामावलियाँ हैं जिनके शब्द 'दुर्गा' से आरम्भ होते हैं। द्वादशनाम बारह नामों को सूचीबद्ध करती है, जबकि द्वात्रिंशन्नाममाला बत्तीस नामों को। बारह नामों वाला रूप अधिक संक्षिप्त है और विशेषतः नित्य पाठ के लिए सुविधाजनक है।
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, किन्तु यह नवरात्रि में तथा मंगलवार और शुक्रवार को विशेष रूप से प्रभावशाली है। परम्परागत रूप से इसे किसी भी अचानक भय, रोग, विपत्ति या संकट के समय तत्काल पढ़ा जाता है, जिससे माता की रक्षा का आवाहन हो।

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