दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् Meaning — Line by Line
दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम्
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
Every verse of दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.
om durgā durgārti-śamanī durgāpad-vinivāriṇī |
ॐ दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी। दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी॥
om durgā durgārti-śamanī durgāpad-vinivāriṇī | durgama-cchedinī durga-sādhinī durga-nāśinī ||
Meaningॐ। दुर्गा; कठिनाइयों से उत्पन्न पीड़ा को शान्त करने वाली; दुर्गम विपत्तियों का निवारण करने वाली; दुर्गम का छेदन करने वाली; दुष्कर को सिद्ध करने वाली; समस्त संकटों का नाश करने वाली।
durgato-ddhāriṇī durga-nihantrī durgamāpahā |
दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा। दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला॥
durgato-ddhāriṇī durga-nihantrī durgamāpahā | durgama-jñāna-dā durga-daitya-loka-davānalā ||
Meaningविपत्ति में पड़े जनों का उद्धार करने वाली; कष्ट की संहारिणी; दुर्गम को हरने वाली; दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली; अजेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल समान।
durgamā durgamālokā durgamātma-svarūpiṇī |
दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी। दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता॥
durgamā durgamālokā durgamātma-svarūpiṇī | durgamārga-pradā durgama-vidyā durgamāśritā ||
Meaningदुर्गमा; जिनका दर्शन भी कठिन है; जिनका स्वरूप ही दुर्गम आत्मतत्त्व है; दुर्गम मार्ग को दिखाने वाली; दुर्लभ विद्या स्वरूपा; शरणागतों की आश्रयदात्री।
nāmāvalim imāṃ yastu durgāyā mama mānavaḥ |
नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः। पठेत्सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः॥
nāmāvalim imāṃ yastu durgāyā mama mānavaḥ | paṭhet sarva-bhayān mukto bhaviṣyati na saṃśayaḥ ||
Meaningजो मनुष्य दुर्गा के इन बारह नामों की इस नाममाला का पाठ करता है, वह समस्त भयों से मुक्त हो जाता है — इसमें कोई संशय नहीं।
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Traditional Devi stotra (recited within the Durga Saptashati / Devi Mahatmyam tradition)
Author: Traditional (Puranic)
Period: Ancient / Classical
दुर्गा द्वादशनाम — 'दुर्गा के बारह नाम' — शाक्त परम्परा का एक प्रिय रक्षा-स्तोत्र है, जो दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के साथ पढ़ा जाता है। इसके नाम माता को प्रत्येक 'दुर्ग' — प्रत्येक दुर्ग, प्रत्येक कठिनाई, प्रत्येक दुस्तर संकट — के विजेता रूप में तथा दैत्यों के संहारक एवं मुक्तिदायी ज्ञान के दाता रूप में स्मरण कराते हैं। संकट के प्रत्येक युग में भक्तों ने इस संक्षिप्त नामावली की शरण ली है, इसके अपने ही वचन पर विश्वास करते हुए कि इसका पाठ समस्त भयों से मुक्त कर देता है।
Frequently Asked Questions
दुर्गा द्वादशनाम स्तोत्रम् क्या है?▼
यह स्तोत्र अपने पाठक को क्या वचन देता है?▼
यह दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला से किस प्रकार सम्बन्धित है?▼
इसका पाठ कब करना चाहिए?▼
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