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दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 32× जप·🕐 नवरात्रि के दौरान, मंगलवार व शुक्रवार को, तथा भय, संकट या कष्ट के किसी भी क्षण में·📜 Traditional Devi stotra (recited within the Durga Saptashati / Devi Mahatmyam tradition)

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अर्थ

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम् देवी दुर्गा के बत्तीस पवित्र नामों की एक प्रभावशाली नामावली है, जिसका प्रत्येक नाम 'दुर्गा' से आरम्भ होकर यह वर्णन करता है कि वे किस प्रकार हर प्रकार की कठिनाई, संकट और दैत्य का नाश करती हैं। यह देवी परम्परा के सर्वाधिक प्रिय लघु स्तोत्रों में से एक है, जो इस आश्वासन के साथ समाप्त होता है कि जो भी इस नाममाला का पाठ करेगा वह समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा। इसे विशेषकर विपत्ति, भय और संकट के समय तथा नवरात्रि में पढ़ा जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Devi stotra (recited within the Durga Saptashati / Devi Mahatmyam tradition) · Traditional (Puranic) · Ancient / Classical

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला — 'दुर्गा के बत्तीस नामों की माला' — शाक्त परम्परा के सर्वाधिक लोकप्रिय रक्षात्मक स्तोत्रों में से एक है, जिसका पाठ दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के साथ किया जाता है। इसके नाम माता को दुर्गमासुर के संहारक तथा प्रत्येक 'दुर्ग' — प्रत्येक किले, प्रत्येक कठिनाई, प्रत्येक दुर्लंघ्य संकट — के विजेता के रूप में स्मरण कराते हैं। प्रत्येक युग में कष्ट से पीड़ित भक्त इस नामावली की शरण में आए हैं, इसके अपने ही वचन पर विश्वास करते हुए कि इसका पाठ समस्त भयों से मुक्ति दिलाता है।

शास्त्रों में वर्णित

परम्परा से कहा जाता है कि विपत्ति से अभिभूत जन — कारावास, रोग, ऋण, शत्रुओं का भय अथवा मृत्यु के आतंक से ग्रस्त — जो श्रद्धापूर्वक दुर्गा के इन बत्तीस नामों का पाठ करते हैं, उनके संकट विलीन हो जाते हैं; क्योंकि स्तोत्र स्वयं प्रतिज्ञा करता है कि पाठकर्ता 'समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा, इसमें संशय नहीं'।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी १॥

durgā durgārtiśamanī durgāpadvinivāriṇī | durgamacchedinī durgasādhinī durganāśinī || 1||

अर्थ:दुर्गा — कठिनाइयों से उत्पन्न पीड़ा को शान्त करने वाली, दुर्गम विपत्तियों का निवारण करने वाली; दुर्गम का छेदन करने वाली, दुष्कर को सिद्ध करने वाली, समस्त संकटों का नाश करने वाली।

श्लोक 2

दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला २॥

durgatoddhāriṇī durganihantrī durgamāpahā | durgamajñānadā durgadaityalokadavānalā || 2||

अर्थ:विपत्ति में पड़े जनों का उद्धार करने वाली, कष्ट की संहारिणी, विघ्नों को हरने वाली; दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली, अजेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल समान।

श्लोक 3

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता ३॥

durgamā durgamālokā durgamātmasvarūpiṇī | durgamārgapradā durgamavidyā durgamāśritā || 3||

अर्थ:दुर्गमा, जिनका दर्शन भी कठिन है, जिनका स्वरूप ही दुर्गम आत्मतत्त्व है; दुर्गम मार्ग को दिखाने वाली, दुर्लभ विद्या स्वरूपा, कठिनता से प्राप्य आश्रयदात्री।

श्लोक 4

दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी ४॥

durgamajñānasaṃsthānā durgamadhyānabhāsinī | durgamohā durgamagā durgamārthasvarūpiṇī || 4||

अर्थ:गूढ़ ज्ञान में स्थित, गहन ध्यान में प्रकाशित होने वाली; दुर्गम मोह को दूर करने वाली, दुर्गम में गमन करने वाली, परम अर्थ स्वरूपा।

श्लोक 5

दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी दुर्गमाङ्गी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी ५॥

durgamāsurasaṃhantrī durgamāyudhadhāriṇī | durgamāṅgī durgamatā durgamyā durgameśvarī || 5||

अर्थ:दुर्गमासुर की संहारिणी, दुर्जेय आयुधों को धारण करने वाली; भयावह अंग वाली, दुर्बोध, दुरापा, दुर्गम की ईश्वरी।

श्लोक 6

दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः ६॥

durgabhīmā durgabhāmā durgabhā durgadāriṇī | nāmāvalimimāṃ yastu durgāyā mama mānavaḥ || 6||

अर्थ:कठिनाई के लिए भीषण, संकट में दीप्तिमयी, अन्धकार में प्रकाशमान, समस्त दुर्गति का विदारण करने वाली। जो मनुष्य दुर्गा की इस नाममाला का पाठ करता है, वह समस्त भयों से मुक्त हो जाता है — इसमें कोई संशय नहीं।

श्लोक 7

पठेत्सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति संशयः ७॥

paṭhetsarvabhayānmukto bhaviṣyati na saṃśayaḥ || 7||

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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दुर्गा🔊durgāदुर्गा — जो दुर्गम (दुष्प्राप्य) हैं / कठिनाइयों को हरने वाली; अजेय दिव्य जगन्माता
दुर्गार्तिशमनी🔊durgārti-śamanīजो कठिनाइयों (दुर्ग) से उत्पन्न पीड़ा (आर्ति) को शान्त करती हैं
दुर्गापद्विनिवारिणी🔊durgāpad-vinivāriṇīजो दुर्गम विपत्तियों एवं दुर्भाग्य का निवारण करती हैं
दुर्गमच्छेदिनी🔊durgama-cchedinīजो दुर्लंघ्य / दुर्गम का छेदन करती हैं
दुर्गसाधिनी🔊durga-sādhinīजो दुष्प्राप्य को सिद्ध करती हैं
दुर्गनाशिनी🔊durga-nāśinīजो कठिनाइयों एवं संकटों का नाश करती हैं
दुर्गतोद्धारिणी🔊durgato-ddhāriṇīजो विपत्ति / पतित अवस्था में पड़े जनों का उद्धार करती हैं
दुर्गनिहन्त्री🔊durga-nihantrīजो कठिनाई के दैत्य (दुर्गम) तथा समस्त कष्टों का वध करती हैं
दुर्गमापहा🔊durgamāpahāजो दुर्लंघ्य विघ्नों को हर लेती हैं
दुर्गमज्ञानदा🔊durgama-jñāna-dāजो दुर्लभ ज्ञान प्रदान करती हैं
दुर्गदैत्यलोकदवानला🔊durga-daitya-loka-davānalāजो दुर्जेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल (वन-अग्नि) समान हैं
दुर्गमात्मस्वरूपिणी🔊durgamātma-svarūpiṇīजिनका स्वरूप ही दुर्गम (अगम्य) आत्मा / परम सत्य है
दुर्गमार्गप्रदा🔊durga-mārga-pradāजो (मोक्ष का) दुर्गम मार्ग प्रकट करती हैं
दुर्गमविद्या🔊durgama-vidyāजो दुष्प्राप्य पवित्र विद्या स्वरूपा हैं
दुर्गमाश्रिता🔊durgamāśritāजिनमें असहाय जन (कठिनता से प्राप्त) आश्रय लेते हैं
दुर्गमध्यानभासिनी🔊durga-ma-dhyāna-bhāsinīजो अपने कठिन ध्यान में प्रकाशित होती हैं
दुर्गमोहा🔊durga-mohāजो दुर्गम मोह को दूर करती हैं
दुर्गमासुरसंहन्त्री🔊durgamāsura-saṃhantrīजो दुर्गमासुर नामक दैत्य का संहार करती हैं
दुर्गमायुधधारिणी🔊durgamāyudha-dhāriṇīजो दुर्जेय (भयंकर) आयुध धारण करती हैं
दुर्गमेश्वरी🔊durgameśvarīअगम्य की अधीश्वरी देवी
दुर्गभीमा🔊durga-bhīmāजो (कठिनाई की शक्तियों के लिए) भीषण हैं
दुर्गभा🔊durga-bhāजो कठिनाई में प्रकाशित होती हैं / संकट के भीतर की दीप्ति
दुर्गदारिणी🔊durga-dāriṇīजो समस्त कठिनाइयों को विदीर्ण कर देती हैं
नामावलिम् इमां🔊nāmāvalim imāṃनामों की यह माला (नामावली)
यस्तु ... मानवः पठेत्🔊yastu ... mānavaḥ paṭhetजो भी मनुष्य (इसका) पाठ करता है
सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति🔊sarva-bhayān mukto bhaviṣyatiवह समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा
न संशयः🔊na saṃśayaḥइसमें कोई संशय नहीं

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम् पाठ के लाभ

देवी दुर्गा के बत्तीस पवित्र नामों का पाठ करता है, जिनमें से प्रत्येक कठिनाई एवं संकट पर उनकी शक्ति का आह्वान करता है

स्तोत्र में ही यह वचन दिया गया है कि यह भक्त को समस्त भयों (सर्व-भय) से मुक्त कर देता है

परम्परा से विपत्ति, रोग, संकट, मुकदमे, ऋण और महान कष्ट के समय पाठ किया जाता है

शत्रुओं, नकारात्मकता, दुर्घटनाओं और बुरी शक्तियों के विरुद्ध दुर्गा की रक्षा का आह्वान करता है

साहस, बल और अत्यन्त दुर्लंघ्य प्रतीत होने वाली बाधाओं पर विजय प्रदान करता है

एक छोटी, सरलता से कण्ठस्थ होने वाली नामावली, जो नित्य रक्षात्मक पाठ के लिए उपयुक्त है

नवरात्रि में तथा देवी के दिन मंगलवार व शुक्रवार को विशेष रूप से प्रभावशाली

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या32बार
उत्तम समयनवरात्रि के दौरान, मंगलवार व शुक्रवार को, तथा भय, संकट या कष्ट के किसी भी क्षण में

स्नान के पश्चात लाल पुष्प, कुमकुम और घी के दीपक के साथ माँ दुर्गा की प्रतिमा के सम्मुख बैठें। पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से बत्तीस नामों का धीरे-धीरे पाठ करें, यथासम्भव नित्य अथवा नवरात्रि में 32 / 108 बार। चूँकि अन्तिम श्लोक समस्त भय से मुक्ति का वचन देता है, परम्परा से किसी भी आकस्मिक संकट, विपत्ति या कष्ट में इसका तुरन्त पाठ किया जाता है। माता की रक्षा की प्रार्थना के साथ समापन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह देवी दुर्गा के बत्तीस (द्वात्रिंश) पवित्र नामों की एक 'माला' (नामावली) है। प्रत्येक नाम 'दुर्गा' से आरम्भ होता है और कठिनाई पर विजय पाने, दैत्यों का नाश करने तथा भक्तों की रक्षा करने की उनकी शक्ति की स्तुति करता है। यह देवी परम्परा का एक छोटा, अत्यन्त प्रिय रक्षात्मक स्तोत्र है।
इसका अन्तिम श्लोक घोषित करता है कि जो भी दुर्गा के नामों की इस माला का पाठ करता है, वह 'समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा — इसमें कोई संशय नहीं' (सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः)। इसीलिए इसका पाठ विशेषकर संकट और कष्ट के समय किया जाता है।
इसका पाठ नित्य किया जा सकता है, परन्तु यह नवरात्रि में तथा मंगलवार व शुक्रवार को विशेष रूप से प्रभावशाली है। परम्परा से किसी भी आकस्मिक भय, विपत्ति, रोग या संकट के क्षण में माता की रक्षा का आह्वान करने के लिए तुरन्त इसका पाठ किया जाता है।
इस नामावली में दुर्गा के बत्तीस नाम हैं, इसीलिए इसे 'द्वात्रिंश' (बत्तीस) कहा जाता है। परम्परा में संख्या 32 को मंगलकारी एवं पूर्ण माना जाता है, और पूर्ण समुच्चय का पाठ देवी की समग्र रक्षात्मक शक्ति का आह्वान करने वाला माना जाता है।

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