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दुर्गा मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 नवरात्रि में, तथा मंगलवार और शुक्रवार को प्रातः या सायंकाल·📜 The beej mantra of Goddess Durga

अन्य नाम / खोज: om dum durgayei namaha · durga beej mantra · om dum durgaye namaha

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अर्थ

दुर्गा मंत्र "ॐ दुं दुर्गायै नमः" देवी दुर्गा का प्रमुख बीज मंत्र है, जो उनके बीजाक्षर "दुं" पर आधारित है। यह अजेय जगज्जननी को नमस्कार है, जो रक्षात्मक शक्ति का स्पंदन है। शत्रुओं, भय और हर प्रकार के संकट से रक्षा हेतु इसका जप किया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

The beej mantra of Goddess Durga · Traditional (Vedic / Puranic)

"ॐ दुं दुर्गायै नमः" देवी दुर्गा का सर्वप्रमुख बीज मंत्र है — अजेय जगज्जननी, जो सिंह पर सवार होती हैं और महिषासुर का संहार करती हैं। उनका बीजाक्षर "दुं" रक्षात्मक शक्ति का स्पंदन धारण करता है। नवरात्रि की नौ रातों में तथा संकट की हर घड़ी में भक्तों ने माता के साहस, शक्ति और अटूट रक्षा का आह्वान करने हेतु इस मंत्र का जप किया है।

मंत्र

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दुं दुर्गायै नमः

Om Dum Durgayai Namah.

अर्थ:ॐ। अजेय जगज्जननी देवी दुर्गा को नमस्कार है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omआदि नाद (प्रणव)
दुं🔊Dumदेवी दुर्गा का बीजाक्षर — रक्षात्मक शक्ति का स्पंदन
दुर्गायै🔊Durgayaiअजेय जगज्जननी देवी दुर्गा को
नमः🔊Namahनमस्कार / मैं नमन करता हूँ

दुर्गा मंत्र पाठ के लाभ

देवी दुर्गा का प्रमुख बीज मंत्र, जो उनके बीजाक्षर "दुं" पर आधारित है — उग्र, रक्षात्मक शक्ति का स्पंदन।

शत्रुओं, संकटों, दुर्घटनाओं, नकारात्मक ऊर्जाओं, काला जादू और हर प्रकार के भय से रक्षा हेतु जपा जाता है।

उस माता के साहस, शक्ति और विजय का आह्वान करता है जो बुराई का संहार करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

नवरात्रि में, अष्टमी व नवमी को तथा मंगलवार और शुक्रवार को विशेष रूप से प्रभावशाली।

पूर्ण श्रद्धा से दुर्गा के चित्र के समक्ष लाल पुष्प, कुंकुम और दीपक के साथ 108 बार जपा जाता है।

जगज्जननी का एक सरल नित्य मंत्र, जो दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती के साथ पढ़ा जाता है।

दुर्गा मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयनवरात्रि में, तथा मंगलवार और शुक्रवार को प्रातः या सायंकाल

स्नान के बाद माँ दुर्गा के चित्र के समक्ष लाल पुष्प, कुंकुम और घी या तेल के दीपक के साथ बैठें। माता की रक्षा का आह्वान करते हुए "ॐ दुं दुर्गायै नमः" का लाल मूँगा या रुद्राक्ष की माला पर 108 बार जप करें। यह नवरात्रि की नौ रातों में विशेष रूप से प्रभावशाली है। रक्षा, साहस और कठिनाइयों पर विजय हेतु इसे श्रद्धापूर्वक जपें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवी दुर्गा का प्रमुख बीज मंत्र "ॐ दुं दुर्गायै नमः" है। "दुं" उनका बीजाक्षर है — उनकी रक्षात्मक, अजेय शक्ति का स्पंदन — और यह मंत्र जगज्जननी को नमस्कार है।
यह शत्रुओं, संकटों, दुर्घटनाओं, नकारात्मकता, काला जादू और भय से रक्षा हेतु तथा साहस, शक्ति और विजय के लिए जपा जाता है। माता का बुराई के संहारक और भक्तों के रक्षक के रूप में आह्वान किया जाता है।
इसे माला पर नित्य 108 बार जपें, विशेषकर प्रातः या सायंकाल और नवरात्रि की नौ रातों में। जब भी रक्षा या साहस की आवश्यकता हो तब भी इसका जप किया जा सकता है।
नवरात्रि (चैत्र और शारद दोनों) सर्वाधिक प्रभावशाली समय है, विशेषकर अष्टमी और नवमी। मंगलवार और शुक्रवार देवी के साप्ताहिक दिन हैं।
इस मंत्र के साथ दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्यम्), "या देवी सर्वभूतेषु", दुर्गा कवच और सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् का पाठ करें।

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