दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम् PDF
दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी । दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी ॥ १॥
durgā durgārtiśamanī durgāpadvinivāriṇī | durgamacchedinī durgasādhinī durganāśinī || 1||
दुर्गा — कठिनाइयों से उत्पन्न पीड़ा को शान्त करने वाली, दुर्गम विपत्तियों का निवारण करने वाली; दुर्गम का छेदन करने वाली, दुष्कर को सिद्ध करने वाली, समस्त संकटों का नाश करने वाली।
दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा । दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला ॥ २॥
durgatoddhāriṇī durganihantrī durgamāpahā | durgamajñānadā durgadaityalokadavānalā || 2||
विपत्ति में पड़े जनों का उद्धार करने वाली, कष्ट की संहारिणी, विघ्नों को हरने वाली; दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली, अजेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल समान।
दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी । दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता ॥ ३॥
durgamā durgamālokā durgamātmasvarūpiṇī | durgamārgapradā durgamavidyā durgamāśritā || 3||
दुर्गमा, जिनका दर्शन भी कठिन है, जिनका स्वरूप ही दुर्गम आत्मतत्त्व है; दुर्गम मार्ग को दिखाने वाली, दुर्लभ विद्या स्वरूपा, कठिनता से प्राप्य आश्रयदात्री।
दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी । दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी ॥ ४॥
durgamajñānasaṃsthānā durgamadhyānabhāsinī | durgamohā durgamagā durgamārthasvarūpiṇī || 4||
गूढ़ ज्ञान में स्थित, गहन ध्यान में प्रकाशित होने वाली; दुर्गम मोह को दूर करने वाली, दुर्गम में गमन करने वाली, परम अर्थ स्वरूपा।
दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी । दुर्गमाङ्गी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी ॥ ५॥
durgamāsurasaṃhantrī durgamāyudhadhāriṇī | durgamāṅgī durgamatā durgamyā durgameśvarī || 5||
दुर्गमासुर की संहारिणी, दुर्जेय आयुधों को धारण करने वाली; भयावह अंग वाली, दुर्बोध, दुरापा, दुर्गम की ईश्वरी।
दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी । नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः ॥ ६॥
durgabhīmā durgabhāmā durgabhā durgadāriṇī | nāmāvalimimāṃ yastu durgāyā mama mānavaḥ || 6||
कठिनाई के लिए भीषण, संकट में दीप्तिमयी, अन्धकार में प्रकाशमान, समस्त दुर्गति का विदारण करने वाली। जो मनुष्य दुर्गा की इस नाममाला का पाठ करता है, वह समस्त भयों से मुक्त हो जाता है — इसमें कोई संशय नहीं।
पठेत्सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः ॥ ७॥
paṭhetsarvabhayānmukto bhaviṣyati na saṃśayaḥ || 7||