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दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम् — Word-by-Word Meaning

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम्

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

दुर्गा
durgā
दुर्गा — जो दुर्गम (दुष्प्राप्य) हैं / कठिनाइयों को हरने वाली; अजेय दिव्य जगन्माता
दुर्गार्तिशमनी
durgārti-śamanī
जो कठिनाइयों (दुर्ग) से उत्पन्न पीड़ा (आर्ति) को शान्त करती हैं
दुर्गापद्विनिवारिणी
durgāpad-vinivāriṇī
जो दुर्गम विपत्तियों एवं दुर्भाग्य का निवारण करती हैं
दुर्गमच्छेदिनी
durgama-cchedinī
जो दुर्लंघ्य / दुर्गम का छेदन करती हैं
दुर्गसाधिनी
durga-sādhinī
जो दुष्प्राप्य को सिद्ध करती हैं
दुर्गनाशिनी
durga-nāśinī
जो कठिनाइयों एवं संकटों का नाश करती हैं
दुर्गतोद्धारिणी
durgato-ddhāriṇī
जो विपत्ति / पतित अवस्था में पड़े जनों का उद्धार करती हैं
दुर्गनिहन्त्री
durga-nihantrī
जो कठिनाई के दैत्य (दुर्गम) तथा समस्त कष्टों का वध करती हैं
दुर्गमापहा
durgamāpahā
जो दुर्लंघ्य विघ्नों को हर लेती हैं
दुर्गमज्ञानदा
durgama-jñāna-dā
जो दुर्लभ ज्ञान प्रदान करती हैं
दुर्गदैत्यलोकदवानला
durga-daitya-loka-davānalā
जो दुर्जेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल (वन-अग्नि) समान हैं
दुर्गमात्मस्वरूपिणी
durgamātma-svarūpiṇī
जिनका स्वरूप ही दुर्गम (अगम्य) आत्मा / परम सत्य है
दुर्गमार्गप्रदा
durga-mārga-pradā
जो (मोक्ष का) दुर्गम मार्ग प्रकट करती हैं
दुर्गमविद्या
durgama-vidyā
जो दुष्प्राप्य पवित्र विद्या स्वरूपा हैं
दुर्गमाश्रिता
durgamāśritā
जिनमें असहाय जन (कठिनता से प्राप्त) आश्रय लेते हैं
दुर्गमध्यानभासिनी
durga-ma-dhyāna-bhāsinī
जो अपने कठिन ध्यान में प्रकाशित होती हैं
दुर्गमोहा
durga-mohā
जो दुर्गम मोह को दूर करती हैं
दुर्गमासुरसंहन्त्री
durgamāsura-saṃhantrī
जो दुर्गमासुर नामक दैत्य का संहार करती हैं
दुर्गमायुधधारिणी
durgamāyudha-dhāriṇī
जो दुर्जेय (भयंकर) आयुध धारण करती हैं
दुर्गमेश्वरी
durgameśvarī
अगम्य की अधीश्वरी देवी
दुर्गभीमा
durga-bhīmā
जो (कठिनाई की शक्तियों के लिए) भीषण हैं
दुर्गभा
durga-bhā
जो कठिनाई में प्रकाशित होती हैं / संकट के भीतर की दीप्ति
दुर्गदारिणी
durga-dāriṇī
जो समस्त कठिनाइयों को विदीर्ण कर देती हैं
नामावलिम् इमां
nāmāvalim imāṃ
नामों की यह माला (नामावली)
यस्तु ... मानवः पठेत्
yastu ... mānavaḥ paṭhet
जो भी मनुष्य (इसका) पाठ करता है
सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति
sarva-bhayān mukto bhaviṣyati
वह समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा
न संशयः
na saṃśayaḥ
इसमें कोई संशय नहीं

Complete Translation

दुर्गा — कठिनाइयों से उत्पन्न पीड़ा को शान्त करने वाली, दुर्गम विपत्तियों का निवारण करने वाली; दुर्गम का छेदन करने वाली, दुष्कर को सिद्ध करने वाली, समस्त संकटों का नाश करने वाली। विपत्ति में पड़े जनों का उद्धार करने वाली, कष्ट की संहारिणी, विघ्नों को हरने वाली; दुर्लभ ज्ञान प्रदान करने वाली, अजेय दैत्यों के लोक के लिए दावानल समान। दुर्गमा, जिनका दर्शन भी कठिन है, जिनका स्वरूप ही दुर्गम आत्मतत्त्व है; दुर्गम मार्ग को दिखाने वाली, दुर्लभ विद्या स्वरूपा, कठिनता से प्राप्य आश्रयदात्री। गूढ़ ज्ञान में स्थित, गहन ध्यान में प्रकाशित होने वाली; दुर्गम मोह को दूर करने वाली, दुर्गम में गमन करने वाली, परम अर्थ स्वरूपा। दुर्गमासुर की संहारिणी, दुर्जेय आयुधों को धारण करने वाली; भयावह अंग वाली, दुर्बोध, दुरापा, दुर्गम की ईश्वरी। कठिनाई के लिए भीषण, संकट में दीप्तिमयी, अन्धकार में प्रकाशमान, समस्त दुर्गति का विदारण करने वाली। जो मनुष्य दुर्गा की इस नाममाला का पाठ करता है, वह समस्त भयों से मुक्त हो जाता है — इसमें कोई संशय नहीं।

Origin & History

Source: Traditional Devi stotra (recited within the Durga Saptashati / Devi Mahatmyam tradition)

Author: Traditional (Puranic)

Period: Ancient / Classical

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला — 'दुर्गा के बत्तीस नामों की माला' — शाक्त परम्परा के सर्वाधिक लोकप्रिय रक्षात्मक स्तोत्रों में से एक है, जिसका पाठ दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के साथ किया जाता है। इसके नाम माता को दुर्गमासुर के संहारक तथा प्रत्येक 'दुर्ग' — प्रत्येक किले, प्रत्येक कठिनाई, प्रत्येक दुर्लंघ्य संकट — के विजेता के रूप में स्मरण कराते हैं। प्रत्येक युग में कष्ट से पीड़ित भक्त इस नामावली की शरण में आए हैं, इसके अपने ही वचन पर विश्वास करते हुए कि इसका पाठ समस्त भयों से मुक्ति दिलाता है।

Frequently Asked Questions

दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला स्तोत्रम् क्या है?
यह देवी दुर्गा के बत्तीस (द्वात्रिंश) पवित्र नामों की एक 'माला' (नामावली) है। प्रत्येक नाम 'दुर्गा' से आरम्भ होता है और कठिनाई पर विजय पाने, दैत्यों का नाश करने तथा भक्तों की रक्षा करने की उनकी शक्ति की स्तुति करता है। यह देवी परम्परा का एक छोटा, अत्यन्त प्रिय रक्षात्मक स्तोत्र है।
यह स्तोत्र क्या वचन देता है?
इसका अन्तिम श्लोक घोषित करता है कि जो भी दुर्गा के नामों की इस माला का पाठ करता है, वह 'समस्त भयों से मुक्त हो जाएगा — इसमें कोई संशय नहीं' (सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः)। इसीलिए इसका पाठ विशेषकर संकट और कष्ट के समय किया जाता है।
इसका पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ नित्य किया जा सकता है, परन्तु यह नवरात्रि में तथा मंगलवार व शुक्रवार को विशेष रूप से प्रभावशाली है। परम्परा से किसी भी आकस्मिक भय, विपत्ति, रोग या संकट के क्षण में माता की रक्षा का आह्वान करने के लिए तुरन्त इसका पाठ किया जाता है।
कितने नाम हैं और 32 ही क्यों?
इस नामावली में दुर्गा के बत्तीस नाम हैं, इसीलिए इसे 'द्वात्रिंश' (बत्तीस) कहा जाता है। परम्परा में संख्या 32 को मंगलकारी एवं पूर्ण माना जाता है, और पूर्ण समुच्चय का पाठ देवी की समग्र रक्षात्मक शक्ति का आह्वान करने वाला माना जाता है।

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