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दुर्गे दुर्घट भारी PDF

दुर्गे दुर्घट भारी की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारीं । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारीं ॥ वारीं वारीं जन्ममरणातें वारीं । हारीं पडलो आतां संकट निवारीं ॥

Durge Durghata Bhari Tujavin Samsari | Anathanathe Ambe Karuna Vistari || Vari Vari Janma-Maranate Vari | Hari Padalo Aata Sankat Nivari ||

हे दुर्गे, तुम्हारे बिना यह संसार दुर्घट कष्टों से भरा है; हे अनाथों की नाथ अंबे, अपनी करुणा विस्तृत करो। बार-बार मेरे जन्म-मरण को टालो — मैं पूर्णतः हार चुका हूँ, अब इस संकट का निवारण करो।

जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥

Jai Devi Jai Devi Jai Mahishasura-Mathani | Suravara-Ishwara-Varade Taraka Sanjivani || Dhru ||

जय हो, जय हो, हे देवी, महिषासुर का मथन करने वाली! देवों और ईश्वरों को भी वरदान देने वाली, तारक और संजीवनी।

त्रिभुवनभुवनीं पाहतां तुजऐसी नाहीं । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांहीं ॥ साही विवाद करितां पडिले प्रवाहीं । ते तूं भक्तांलागीं पावसि लवलाहीं ॥

Tribhuvana-Bhuvani Pahata Tuj-Aisi Nahi | Chari Shramale Parantu Na Bolave Kahi || Sahi Vivad Karita Padile Pravahi | Te Tu Bhaktanlagi Paavasi Lavalahi ||

तीनों लोकों के समस्त भुवनों में तुम्हारे समान कोई नहीं। चारों वेद थक गए पर कुछ कह न सके; छहों (दर्शन) विवाद करते हुए प्रवाह में बह गए — फिर भी तुम भक्तों के लिए शीघ्र प्रकट होती हो।

प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासां । क्लेशांपासुनि सोडवीं तोडीं भवपाशां ॥ अंबे तुजवांचून कोण पुरवील आशा । नरहरि तल्लिन झाला पदपंकजलेशा ॥

Prasanna-Vadane Prasanna Hosi Nijadasa | Kleshanpasuni Sodavi Todi Bhavapasha || Ambe Tujavanchun Kon Puravil Asha | Narahari Tallin Zhala Padapankaja-Lesha ||

प्रसन्न मुख से तुम अपने दासों पर प्रसन्न होती हो; क्लेशों से छुड़ाओ, भवपाश काटो। हे अंबे, तुम्हारे बिना कौन आशा पूरी करेगा? नरहरि तुम्हारे चरण-कमल की एक रज में ही तल्लीन हो गया है।