Mantra.Tips

दुर्गे स्मृता हरसि PDF

दुर्गे स्मृता हरसि की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥

durge smṛtā harasi bhītimaśeṣajantoḥ svasthaiḥ smṛtā matimatīva śubhāṃ dadāsi dāridryaduḥkhabhayahāriṇi kā tvadanyā sarvopakārakaraṇāya sadārdracittā

हे दुर्गे! स्मरण किए जाने पर आप प्रत्येक प्राणी का भय हर लेती हैं; सुखी जनों द्वारा स्मरण किए जाने पर अत्यन्त शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। हे दारिद्र्य, दुःख और भय को हरने वाली! आपके अतिरिक्त और कौन है जिसका चित्त सबके उपकार के लिए सदा आर्द्र (दयालु) रहता है?

त्रैलोक्यमेतदखिलं रिपुनाशनेन त्रातं त्वया समरमूर्धनि तेऽपि हत्वा । नीता दिवं रिपुगणा भयमप्यपास्तम् अस्माकमुन्मदसुरारिभवं नमस्ते ॥

trailokyametadakhilaṃ ripunāśanena trātaṃ tvayā samaramūrdhani te'pi hatvā nītā divaṃ ripugaṇā bhayamapyapāstam asmākamunmadasurāribhavaṃ namaste

इस सम्पूर्ण त्रैलोक्य की रक्षा आपने शत्रुओं का नाश करके की है; और युद्ध के मुहाने पर उन्हें मारकर शत्रु-समूहों को स्वर्ग पहुँचाया है, तथा उन्मत्त देवशत्रुओं से उत्पन्न हमारे भय को भी दूर किया है — आपको नमस्कार!

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके । घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च ॥

śūlena pāhi no devi pāhi khaḍgena cāmbike ghaṇṭāsvanena naḥ pāhi cāpajyāniḥsvanena ca

हे देवी! अपने शूल से हमारी रक्षा कीजिए; हे अम्बिके! खड्ग से रक्षा कीजिए; अपनी घण्टा के नाद से और धनुष की प्रत्यंचा के नाद से हमारी रक्षा कीजिए।