Mantra.Tips

दुर्जनः परिहर्तव्यः — Word-by-Word Meaning

दुर्जनः परिहर्तव्यः

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

दुर्जनः
durjanaḥ
दुर्जन, दुष्ट स्वभाव वाला व्यक्ति
परिहर्तव्यः
parihartavyaḥ
त्याग देना चाहिए, अवश्य ही दूर रखना चाहिए
विद्यया
vidyayā
विद्या से, ज्ञान से
अलङ्कृतः
alaṅkṛtaḥ
अलंकृत, सुशोभित
अपि सन्
api san
होने पर भी (ऐसा होते हुए भी)
मणिना
maṇinā
मणि से, रत्न से
भूषितः
bhūṣitaḥ
सुशोभित, अलंकृत (फण पर)
सर्पः
sarpaḥ
सर्प, साँप
किम् असौ
kim asau
क्या वह...?
न भयङ्करः
na bhayaṅkaraḥ
भयंकर नहीं, खतरनाक नहीं

Complete Translation

दुर्जन को त्याग देना चाहिए, भले ही वह विद्या से अलंकृत क्यों न हो। जैसे मणि से सुशोभित सर्प — क्या वह कम भयंकर हो जाता है? यह श्लोक चेतावनी देता है कि केवल विद्या किसी व्यक्ति को संगति योग्य नहीं बना देती; दुष्ट स्वभाव कितना भी विद्वान क्यों न दिखे, भयंकर ही रहता है।

Origin & History

Source: Bhartrhari Niti Shataka

Author: Bhartrhari

Period: Classical Sanskrit literature (c. 5th century CE)

नीतिशतक भर्तृहरि के तीन प्रसिद्ध शतकों में से पहला है, जो आचरण, ज्ञान और सांसारिक रीतियों पर सौ सूक्तियों का संग्रह है। चरित्र और विवेक पर इसके अनेक श्लोकों में, यह श्लोक मणि-अलंकृत सर्प के अविस्मरणीय चित्र का प्रयोग करके चेतावनी देता है कि दुष्ट स्वभाव वाला व्यक्ति, चाहे कितना भी विद्वान हो, त्याज्य है — क्योंकि ज्ञान किसी दुष्ट हृदय को सुरक्षित नहीं बना सकता।

Frequently Asked Questions

दुर्जनः परिहर्तव्यः कहाँ से आया है?
यह भर्तृहरि के नीतिशतक का एक प्रसिद्ध सुभाषित है — नीति और सांसारिक ज्ञान पर रचित उनका शास्त्रीय शतक। यह विवेक और सत्संगति के चुनाव पर सर्वाधिक उद्धृत श्लोकों में से एक है।
इस श्लोक का केन्द्रीय उपदेश क्या है?
यह कि दुर्जन को त्याग देना चाहिए भले ही वह विद्वान हो, क्योंकि ज्ञान दुष्ट स्वभाव को वश में नहीं करता। मणिधारी सर्प का चित्र दर्शाता है कि बाह्य अलंकरण या चमक किसी बुरे चरित्र के खतरे को कम नहीं करती।
क्या यह श्लोक विद्या को कम आँकता है?
नहीं — भर्तृहरि अन्यत्र विद्या की बहुत प्रशंसा करते हैं। यहाँ बात यह है कि विद्या को सच्चरित्र से जुड़ा होना चाहिए। दुर्जन के हाथ में ज्ञान सर्प पर मणि के समान है: प्रभावशाली, किन्तु विश्वास या निकटता के योग्य नहीं।

Ready to start chanting?

See Benefits & How to Chant →