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द्वादश स्तोत्र PDF

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वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम्। इन्दिरा-पति-माद्य-आदि-वरद-इष्ट-वर-प्रदम्॥

Vande vandyaṁ sadānandaṁ vāsudevaṁ nirañjanam। Indirā-pati-mādya-ādi-varada-iṣṭa-vara-pradam॥

मैं वासुदेव को प्रणाम करता हूँ — जो वन्दनीय हैं, सदा आनन्दमय हैं, निर्मल और निरंजन हैं, इन्दिरा (लक्ष्मी) के पति हैं, श्रेष्ठ वरदाता हैं और सभी इष्ट वरदान देने वाले हैं।

नमामि निखिल-आधार-दुरित-अघ-ओघ-नाशनम्। परमानन्द-तीर्थ-उक्तं हरि-पादाब्ज-षट्पदम्॥

Namāmi nikhila-ādhāra-durita-agha-ogha-nāśanam। Paramānanda-tīrtha-uktaṁ hari-pādābja-ṣaṭpadam॥

मैं उन भगवान को नमस्कार करता हूँ जो समस्त सृष्टि के आधार हैं, पाप और अघ के समूह का नाश करने वाले हैं — जिनकी स्तुति आनन्दतीर्थ (मध्वाचार्य) ने की, जो हरि के चरण-कमलों के भ्रमर हैं।

सृष्टि-स्थिति-संहार-कर्तारं विश्व-तोमुखम्। सर्व-ज्ञं सर्व-शक्तिं तं नमामि श्रिय-पति हरिम्॥

Sṛṣṭi-sthiti-saṁhāra-kartāraṁ viśva-tomukham। Sarva-jñaṁ sarva-śaktiṁ taṁ namāmi śriya-pati harim॥

मैं उन श्रीपति हरि को प्रणाम करता हूँ — जो सृष्टि, स्थिति और संहार के कर्ता हैं, जिनके मुख सब ओर हैं, जो सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान हैं।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

Oṁ namo bhagavate vāsudevāya॥

ॐ वासुदेव को नमस्कार है।