गणानां त्वा गणपतिं हवामहे PDF
गणानां त्वा गणपतिं हवामहे की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥
Om gananam tva ganapatim havamahe Kavim kavinam upamashravastamam Jyeshtharajam brahmanam brahmanaspata A nah shrinvann utibhih sida sadanam
ॐ। हे गणपति, हम आपका आवाहन करते हैं — समस्त गणों (होस्तों एवं प्राणियों) के स्वामी, कवियों में कवि, अनुपम कीर्ति वाले, ब्रह्म (मन्त्र-शक्ति) के ज्येष्ठ राजा — हे ब्रह्मणस्पति, हमारी प्रार्थना सुनकर अपनी रक्षक कृपाओं के साथ हमारे पास आइए और (हमारे पूजास्थल एवं हृदय में) विराजिए।