Mantra.Tips

हंसयुक्तविमानस्थे — नारायणि नमोऽस्तु ते (मातृका रूप) — Word-by-Word Meaning

हंसयुक्तविमानस्थे — नारायणि नमोऽस्तु ते (मातृका रूप)

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

हंसयुक्तविमानस्थे
haṃsayuktavimānasthe
हे हंसयुक्त विमान पर विराजमान (ब्राह्मणी रूप में)
ब्रह्माणीरूपधारिणि
brahmāṇīrūpadhāriṇi
ब्राह्मणी (ब्रह्मा की शक्ति) का रूप धारण करने वाली
नारायणि नमोऽस्तु ते
nārāyaṇi namo'stu te
हे नारायणि, आपको नमस्कार हो!
त्रिशूलचन्द्राहिधरे
triśūlacandrāhidhare
हे त्रिशूल, चन्द्र और सर्प धारण करने वाली
माहेश्वरीस्वरूपेण
māheśvarīsvarūpeṇa
माहेश्वरी (शिव की शक्ति) के रूप में
मयूरकुक्कुटवृते
mayūrakukkuṭavṛte
हे मयूर और कुक्कुट से घिरी हुई
कौमारीरूपसंस्थाने
kaumārīrūpasaṃsthāne
कौमारी (कुमार/स्कन्द की शक्ति) के रूप में स्थित
शङ्खचक्रगदाशार्ङ्ग
śaṅkhacakragadāśārṅga
शंख, चक्र, गदा और शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाली
वैष्णवीरूपे
vaiṣṇavīrūpe
वैष्णवी (विष्णु की शक्ति) के रूप में
दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे
daṃṣṭroddhṛtavasundhare
जो अपनी दाढ़ से पृथ्वी को उठाने वाली हैं (वाराही रूप में)
वराहरूपिणि
varāharūpiṇi
वराह (वाराही) के रूप में
नृसिंहरूपेण
nṛsiṃharūpeṇa
नृसिंह (नारसिंही) के उग्र रूप में
त्रैलोक्यत्राणसहिते
trailokyatrāṇasahite
त्रैलोक्य की रक्षा से युक्त
किरीटिनि महावज्रे
kirīṭini mahāvajre
हे मुकुटधारिणी, महान् वज्र धारण करने वाली (ऐन्द्री रूप में)
वृत्रप्राणहरे चैन्द्रि
vṛtraprāṇahare caindri
हे ऐन्द्री, जिसने वृत्र के प्राण हर लिये
शिवदूतीस्वरूपेण
śivadūtīsvarūpeṇa
शिवदूती (जिसने शिव को अपना दूत बनाया) के रूप में
दंष्ट्राकरालवदने
daṃṣṭrākarālavadane
हे दाढ़ों से विकराल मुख वाली
शिरोमालाविभूषणे
śiromālāvibhūṣaṇe
(राक्षसों के) मुण्डों की माला से विभूषित
चामुण्डे मुण्डमथने
cāmuṇḍe muṇḍamathane
हे चामुण्डे, मुण्ड का संहार करने वाली

Complete Translation

हे हंसयुक्त विमान पर विराजमान, ब्राह्मणी रूप धारण करने वाली, कुश-जल से अभिषेक करने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे त्रिशूल, चन्द्र और सर्प धारण करने वाली, महान् वृषभ पर सवार माहेश्वरी रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे मयूर और कुक्कुट से घिरी, महाशक्ति धारण करने वाली, निष्पाप कौमारी रूप में स्थित! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे शंख, चक्र, गदा और शार्ङ्ग रूप परम आयुध धारण करने वाली! प्रसन्न होइए, हे वैष्णवी रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे उग्र महाचक्र धारण करने वाली, दाढ़ से पृथ्वी को उठाने वाली, कल्याणी वराह (वाराही) रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे उग्र नृसिंह रूप से दैत्यों के वध में उद्यत, त्रैलोक्य की रक्षा से युक्त! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे मुकुट धारण करने वाली, महान् वज्र धारण करने वाली, सहस्र नेत्रों से उज्ज्वल, वृत्र के प्राण हरने वाली ऐन्द्री! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे शिवदूती रूप से दैत्यों के महाबल का नाश करने वाली, घोर रूप और महानाद वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे दाढ़ों से विकराल मुख वाली, मुण्डमाला से विभूषित, मुण्ड का मर्दन करने वाली चामुण्डे! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

Origin & History

Source: Durga Saptashati Chapter 11

Author: Sage Markandeya (Markandeya Purana)

Period: Ancient (part of the Markandeya Purana, c. 400–600 CE)

देवी द्वारा महान् असुर शुम्भ के वध के पश्चात्, इन्द्र और देवता — उनके कमलमुख आनन्द से खिले हुए — कात्यायनी की स्तुति में नारायणी स्तुति का गायन करते हैं। इस मध्यवर्ती अंश में वे देवी को उनके प्रत्येक ब्रह्माण्डीय मातृ-रूप (मातृका) में प्रणाम करते हैं — वे ही शक्तियाँ जो रक्तबीज और दैत्यसेनाओं से युद्ध करने के लिए देवताओं से प्रकट हुई थीं — यह पहचानते हुए कि एक ही देवी नारायणी ब्राह्मणी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, नारसिंही, ऐन्द्री, शिवदूती और चामुण्डा के रूप में प्रकट होती हैं।

Frequently Asked Questions

इस स्तोत्र में जिन मातृका रूपों के नाम हैं, वे कौन हैं?
वे हैं ब्राह्मणी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, नारसिंही, ऐन्द्री, शिवदूती और चामुण्डा — वे मातृशक्तियाँ जो ब्रह्मा, शिव, कुमार, विष्णु, वराह, नृसिंह, इन्द्र की शक्तियाँ तथा देवी के उग्र संहारक रूप धारण करती हैं।
'हंसयुक्तविमानस्थे' दुर्गा सप्तशती में कहाँ आता है?
यह ग्यारहवें अध्याय की नारायणी स्तुति का अंश है (श्लोक 12–20), जिसे शुम्भ के वध के पश्चात् इन्द्र और देवताओं ने गाया था। प्रत्येक श्लोक 'नारायणि नमोऽस्तु ते' से समाप्त होता है।
'नारायणि नमोऽस्तु ते' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'हे नारायणि, आपको नमस्कार हो'। नारायणी नारायण (विष्णु) की शक्ति तथा परम देवी का एक नाम है। यह बारम्बार दोहराया जाने वाला ध्रुवपद देवी के प्रत्येक रूप में पूर्ण समर्पण को व्यक्त करता है।
यह शेष नारायणी स्तुति से किस प्रकार भिन्न है?
सम्पूर्ण नारायणी स्तुति देवी को जगत् के आधार, वैष्णवी शक्ति एवं विश्व के बीज रूप में, तथा लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा के रूप में स्तुति करती है। यह विशेष अंश उनके नौ युद्ध-कुशल मातृका रूपों पर केन्द्रित है, जो उन्हें दिव्य शक्ति के अनेक स्वरूपों पर एक सजीव ध्यान बनाता है।

Ready to start chanting?

See Benefits & How to Chant →