हनुमान स्तुति (अतुलितबलधामं) Meaning — Line by Line
हनुमान स्तुति (अतुलितबलधामं)
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
Every verse of हनुमान स्तुति (अतुलितबलधामं) with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.
Atulita-Bala-Dhamam Hema-Shailabha-Deham
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् । सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥
Atulita-Bala-Dhamam Hema-Shailabha-Deham Danuja-Vana-Krishanum Jnaninam-Agraganyam | Sakala-Guna-Nidhanam Vananam-Adhisham Raghupati-Priya-Bhaktam Vatajatam Namami ||
Meaningमैं पवनपुत्र को प्रणाम करता हूँ — जो अतुलनीय बल के धाम हैं, जिनका शरीर स्वर्णगिरि (सुमेरु) के समान दीप्तिमान है, जो दानवरूपी वन के लिए प्रचण्ड अग्नि हैं, ज्ञानियों में अग्रगण्य, समस्त गुणों के निधान, वानरों के अधीश एवं रघुपति (श्रीराम) के परमप्रिय भक्त हैं।
Goshpadi-Krita-Varisham Mashaki-Krita-Rakshasam |
गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम् । रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम् ॥
Goshpadi-Krita-Varisham Mashaki-Krita-Rakshasam | Ramayana-Maha-Mala-Ratnam Vande-'nilatmajam ||
Meaningमैं अनिलपुत्र की वन्दना करता हूँ, जिन्होंने विशाल समुद्र को गाय के खुर के गड्ढे के जल के समान बना दिया, राक्षसों को मच्छर के समान तुच्छ कर दिया, और जो रामायणरूपी महामाला के रत्न हैं।
Yatra Yatra Raghunatha-Kirtanam
यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम् । भाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ॥
Yatra Yatra Raghunatha-Kirtanam Tatra Tatra Krita-Mastaka-Anjalim | Bhashpa-Vari-Paripurna-Lochanam Marutim Namata Rakshasantakam ||
Meaningजहाँ-जहाँ रघुनाथ (श्रीराम) का कीर्तन होता है, वहाँ-वहाँ हनुमान सिर झुकाकर मस्तक पर हाथ जोड़े, प्रेमाश्रुओं से पूर्ण नेत्रों के साथ उपस्थित रहते हैं — उन राक्षसान्तक मारुति को प्रणाम करो।
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Dhyana-shlokas of Hanuman; the first verse is the Sanskrit invocation (mangalacharana) of Sundara Kanda in Goswami Tulsidas's Ramcharitmanas
Author: Traditional; the opening verse is part of Tulsidas's Ramcharitmanas (Sundara Kanda)
Period: 16th century CE and earlier (traditional)
ये श्लोक वह परम्परागत ध्यान बनाते हैं जिनसे भक्त सुन्दरकाण्ड का पाठ आरम्भ करते हैं — रामायण का वह काण्ड जो हनुमान की लंका-यात्रा का वर्णन करता है। गोस्वामी तुलसीदास अपने सुन्दरकाण्ड का आरम्भ संस्कृत श्लोक 'अतुलितबलधामं' से करते हैं, हनुमान के पराक्रमों का वर्णन करने से पूर्व उनका आवाहन करते हुए। साथी श्लोक 'गोष्पदीकृतवारीशं' एवं 'यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं' भी समान रूप से प्रिय हैं, जिनमें अन्तिम हनुमान को प्रत्येक राम-कीर्तन में सदा उपस्थित, अश्रुपूरित भक्त के रूप में चित्रित करता है।
Frequently Asked Questions
हनुमान स्तुति (अतुलितबलधामं) क्या है?▼
इन श्लोकों को कब जपना चाहिए?▼
'गोष्पदीकृतवारीशं' का क्या अर्थ है?▼
तीसरे श्लोक में हनुमान को रोते हुए क्यों दिखाया गया है?▼
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